नई दिल्ली: देश के अधिकांश हिस्सों में इन दिनों मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. पूर्वी भारत के कुछ इलाकों को छोड़ दें तो उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा रही है. बारिश की कमी का असर खेती-बाड़ी पर भी दिखाई देने लगा है. इसके साथ ही धान, मक्का और दलहन जैसी फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है, वहीं जलाशयों का जलस्तर घटने से सिंचाई और पेयजल को लेकर भी चिंता बढ़ रही है.
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की ट्रफ लाइन अपनी सामान्य स्थिति से हट गई है. इसके कारण बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली हवाएं देश के बड़े हिस्से तक नहीं पहुंच पा रही हैं. हालांकि आने वाले दिनों में स्थिति बदलने की संभावना जताई जा रही है.
मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि पश्चिमी प्रशांत महासागर में बन रहे कुछ ट्रॉपिकल सिस्टम अगर आगे बढ़कर बंगाल की खाड़ी तक पहुंचते हैं, तो 18 से 25 जुलाई के बीच मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है. अंतरराष्ट्रीय मॉडल ECMWF, GFS और भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान भी इसी संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी इस पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी और अगले कुछ दिनों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है.
इस बीच उत्तर-पश्चिम भारत के लिए एक और राहत की खबर है. एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिसका असर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में देखने को मिल सकता है. अगले दो से तीन दिनों के दौरान इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिससे तापमान में भी कुछ गिरावट आ सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रशांत महासागर के सिस्टम अनुकूल दिशा में आगे बढ़ते हैं तो मानसून की ट्रफ दोबारा सामान्य स्थिति में लौट सकती है. इससे मध्य भारत, उत्तर भारत और पश्चिमी राज्यों में अच्छी बारिश होने की संभावना बढ़ जाएगी। वहीं, अगर ये सिस्टम कमजोर पड़ते हैं या दिशा बदल लेते हैं, तो सूखे जैसी स्थिति और गंभीर हो सकती है.मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बदलते जलवायु पैटर्न के कारण मानसून का व्यवहार लगातार अनिश्चित होता जा रहा है. ऐसे में अगले दो सप्ताह का मौसम देश की कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. First Updated : Sunday, 12 July 2026