लोकसभा में ताकत बढ़ाने की तैयारी में NDA, विपक्ष के कई सांसदों पर टिकी नजर

केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) अपने संसदीय संख्याबल को और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है. माना जा रहा है कि आने वाले समय में कई विपक्षी सांसद अपना रुख बदल सकते हैं, जिससे लोकसभा की तस्वीर भी बदल सकती है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) अपने संसदीय संख्याबल को और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है. हाल ही में कुछ विपक्षी दलों के भीतर असंतोष और संभावित टूट की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है. माना जा रहा है कि आने वाले समय में कई विपक्षी सांसद अपना राजनीतिक रुख बदल सकते हैं, जिससे लोकसभा की तस्वीर भी बदल सकती है.

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के भीतर भी असंतोष की चर्चाएं सामने आ रही हैं. रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि पार्टी के कुछ सांसद भविष्य में अलग रास्ता चुन सकते हैं. वर्तमान में लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल 9 सांसद हैं. दल-बदल कानून के तहत किसी भी समूह को कानूनी दिक्कतों से बचने के लिए आवश्यक संख्या में सांसदों का एक साथ फैसला लेना पड़ता है. इसी वजह से राजनीतिक विश्लेषकों की नजर पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों पर बनी हुई है.

शिंदे गुट को माना जा रहा संभावित विकल्प

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी प्रकार का विभाजन होता है तो संबंधित सांसदों के लिए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सबसे स्वाभाविक विकल्प हो सकती है. पिछले कुछ वर्षों में शिंदे ने राज्य के कई क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की है. उनके नेतृत्व में कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपना समर्थन बदला है. इसी कारण महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन लगातार बदलता दिखाई दे रहा है.

महाराष्ट्र चुनाव के बाद बदले सियासी समीकरण

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद राज्य की राजनीति में कई नए समीकरण बने हैं. एनडीए की मजबूत स्थिति ने विपक्षी दलों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद कई नेताओं ने अपने भविष्य और राजनीतिक संभावनाओं का नए सिरे से आकलन करना शुरू किया है. इसी वजह से विभिन्न दलों में अंदरूनी चर्चाओं और संभावित बदलावों की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं.

लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत पर नजर

एनडीए की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य लोकसभा में अपना संख्याबल और बढ़ाना माना जा रहा है. संसद के निचले सदन में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है. वर्तमान स्थिति में गठबंधन अपने सहयोगियों के साथ मजबूत स्थिति में है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कुछ और सांसद समर्थन देते हैं तो एनडीए की ताकत और बढ़ सकती है. यही वजह है कि राजनीतिक गतिविधियां तेज नजर आ रही हैं.

टीएमसी में भी उठीं बगावत की चर्चाएं

हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को लेकर भी कई तरह की अटकलें सामने आई हैं. कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि पार्टी के भीतर एक समूह ने बड़ी संख्या में सांसदों के समर्थन का दावा किया है. हालांकि इन दावों को लेकर आधिकारिक स्तर पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इन खबरों ने विपक्षी राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. राजनीतिक दल फिलहाल अपने-अपने संगठन को मजबूत बनाए रखने और संभावित असंतोष को संभालने में जुटे हुए हैं.

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