नई दिल्ली: भारत की राजधानी नई दिल्ली आज से एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक की मेजबानी कर रही है. BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के उच्च प्रतिनिधियों की दो दिवसीय बैठक 22 जून से शुरू हो रही है. वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के लगातार बदलते स्वरूप के बीच यह सम्मेलन काफी अहम माना जा रहा है. बैठक में सदस्य देशों के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी एक मंच पर जुटकर उन खतरों पर चर्चा करेंगे जो आज दुनिया के सामने नई चुनौतियों के रूप में उभर रहे हैं.
इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे. भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक का मुख्य विषय गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां हैं, जिनका प्रभाव दुनिया के लगभग हर देश पर पड़ रहा है.
बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उन नए पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है, जो तकनीक के विकास के साथ तेजी से सामने आ रहे हैं. साइबर सुरक्षा, डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग और आधुनिक तकनीकों से पैदा होने वाले जोखिमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर हमलों और डेटा सुरक्षा से जुड़े खतरों को देखते हुए BRICS देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने की जरूरत है. यही वजह है कि इस बैठक में तकनीकी सुरक्षा प्रमुख एजेंडों में शामिल है.
सम्मेलन में BRICS सदस्य देशों के शीर्ष अधिकारी हिस्सा लेने वाले हैं. जानकारी के अनुसार, चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु और ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हो सकते हैं. चीन ने पहले ही पुष्टि कर दी है कि वांग यी नई दिल्ली पहुंचकर इस बैठक में भाग लेंगे. इसके अलावा उनकी भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ अलग से मुलाकात भी हो सकती है. इस संभावित बैठक पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है.
सूत्रों के अनुसार, सम्मेलन में केवल साइबर और तकनीकी सुरक्षा ही नहीं बल्कि कई संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है. सीमा पार आतंकवाद, पश्चिम एशिया की स्थिति, रूस-यूक्रेन संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विषय एजेंडे में शामिल रह सकते हैं. भारत इस मंच पर आतंकवाद के खिलाफ अपनी चिंताओं को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है. विशेष रूप से सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों और सुरक्षा खतरों पर भारत का फोकस रहने की संभावना है. इसके अलावा पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी तनाव भी चर्चा का विषय बन सकता है.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक के दौरान BRICS के आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सुरक्षा समूह की हालिया बैठकों के निष्कर्षों की भी समीक्षा की जाएगी. इस समीक्षा का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करना है ताकि आतंकवाद, साइबर अपराध और अन्य सुरक्षा चुनौतियों का सामूहिक रूप से सामना किया जा सके. माना जा रहा है कि इस बैठक से भविष्य की सुरक्षा रणनीतियों को नई दिशा मिलेगी.
हालांकि BRICS मंच पर सहयोग के साथ-साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद भी मौजूद हैं. हाल ही में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों के बीच कुछ विषयों पर सहमति नहीं बन सकी थी, जिसके कारण संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका था. ऐसे में नई दिल्ली में हो रही यह बैठक इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि क्या सदस्य देश सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर साझा समझ विकसित कर पाते हैं या नहीं.
विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक आगामी BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी. भारत की BRICS अध्यक्षता का विषय "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" रखा गया है. अब 11 सदस्य देशों वाला BRICS समूह वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एक प्रभावशाली मंच बन चुका है. ऐसे में नई दिल्ली में आयोजित यह सम्मेलन न केवल सुरक्षा एजेंडे को दिशा देगा, बल्कि सदस्य देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है. First Updated : Monday, 22 June 2026