Tahawwur Rana: 2008 में मुंबई में हुए भीषण आतंकी हमले की गहरी साजिश को उजागर करने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने तहव्वुर राणा से गहन पूछताछ शुरू कर दी है. अमेरिका से प्रत्यर्पण के बाद राणा को भारत लाया गया है, जहां अब एजेंसी उसके उस नेटवर्क और संपर्कों की जांच कर रही है जो हमले के पीछे सक्रिय थे.
पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा पर आरोप है कि उसने हमले के मुख्य साजिशकर्ता डेविड कोलमैन हेडली को लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल सपोर्ट देने के लिए 'कर्मचारी बी' नाम के एक व्यक्ति की मदद ली थी. एनआईए अब राणा को उसी कर्मचारी के सामने बैठाकर पूछताछ करने की योजना बना रही है, ताकि हमले से जुड़े और भी अहम सुराग मिल सकें.
एनआईए सूत्रों के मुताबिक, राणा ने अपने एक स्टाफ मेंबर ‘कर्मचारी बी’ को निर्देश दिया था कि वह हेडली को रिसेप्शन, ट्रांसपोर्टेशन, ठहरने और ऑफिस-कम-रेजिडेंस की व्यवस्था में मदद करे. हालांकि एजेंसी यह भी स्पष्ट कर रही है कि कर्मचारी बी को हेडली के आतंकी मंसूबों की जानकारी नहीं थी. वह केवल राणा के निर्देशों का पालन कर रहा था.
एनआईए का कहना है कि राणा ने अपने इमिग्रेशन कारोबार की आड़ में हेडली के भारत में घुसपैठ के मिशन को आसान बनाया. उसने हेडली को वीजा दिलाने, उसकी मुस्लिम पहचान और पाकिस्तानी मूल को छुपाने में मदद की. इतना ही नहीं, राणा ने हेडली को भारतीय व्यापारिक और सैन्य समुदाय में घुलने-मिलने का माहौल भी उपलब्ध कराया.
सूत्रों के अनुसार, तहव्वुर राणा ने हेडली की पत्नी फैज़ा आउतालाह के लिए भी दस्तावेज़ तैयार कराने में भूमिका निभाई. इसके अलावा, उसने हेडली के लिए कराची से भारत आने के लिए फ्लाइट टिकट की बुकिंग भी की थी.
एनआईए की चार्जशीट में यह भी सामने आया है कि राणा और हेडली के बीच 230 से अधिक फोन कॉल्स का आदान-प्रदान हुआ था. राणा की बातचीत एक अन्य आरोपी 'मेजर इक़बाल' के साथ भी हुई थी, जो हमले की साजिश में शामिल बताया जाता है.
64 वर्षीय तहव्वुर राणा को भारत लाने के बाद कोर्ट ने उसे 18 दिन की एनआईए कस्टडी में भेज दिया है. उस पर साजिश, हत्या, आतंकी गतिविधि को अंजाम देने और जालसाज़ी जैसे कई गंभीर आरोप दर्ज हैं. अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि पूछताछ के दौरान पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के साथ राणा के संभावित संबंधों का भी खुलासा होगा. First Updated : Sunday, 13 April 2025