डिजिटल दुनिया में तेजी से पांव पसार रहे ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को लेकर केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऑनलाइन गेमिंग विनियमन एवं संवर्धन अधिनियम को मंज़ूरी दे दी है. इसका मकसद न केवल इस क्षेत्र को नियमों में बांधना है, बल्कि ऑनलाइन सट्टेबाजी और नकद लेन-देन पर नियंत्रण स्थापित करना भी है.
सूत्रों के अनुसार, नए कानून के लागू होते ही नकद-आधारित सभी ऑनलाइन गेमिंग लेनदेन पर रोक लगने की पूरी संभावना है. इसका मतलब है कि जो गेमिंग प्लेटफॉर्म्स यूज़र्स से पैसे लेकर गेमिंग या सट्टेबाजी कराते हैं, उन्हें अब वित्तीय संस्थानों या बैंकों से कोई सहयोग नहीं मिल पाएगा.
बीते कुछ वर्षों में ऑनलाइन गेमिंग की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही आर्थिक धोखाधड़ी, लत और कर चोरी के मामले भी सामने आने लगे हैं. अक्टूबर 2023 में जब सरकार ने इस क्षेत्र पर 28% जीएसटी लागू किया, तबसे यह उद्योग जांच के घेरे में आ गया.
वित्त वर्ष 2025 से गेमिंग में जीत की रकम पर 30% कर लागू किया गया है. अपतटीय यानी विदेशी गेमिंग कंपनियों को भी भारत के टैक्स दायरे में लाया गया है.
दिसंबर 2023 में भारतीय न्याय संहिता में संशोधन कर अनधिकृत सट्टेबाजी को एक दंडनीय अपराध बनाया गया. इसके तहत दोषी पाए जाने पर सात साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है. अब तक केंद्र सरकार 1,400 से अधिक अवैध वेबसाइटों और ऐप्स को ब्लॉक कर चुकी है, जो ऑनलाइन सट्टेबाजी या जुए में लिप्त थीं.
शिक्षा मंत्रालय ने ऑनलाइन गेमिंग से नाबालिगों में बढ़ती लत को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों को सलाह जारी की है. वहीं सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने प्रसारकों को निर्देश दिया है कि वे गेमिंग के वित्तीय जोखिमों से संबंधित अस्वीकरण अनिवार्य रूप से प्रसारित करें.
इस विधेयक से केंद्र सरकार को उम्मीद है कि पूरे देश में एक समान नियम व्यवस्था से धोखाधड़ी, कानूनी उलझन और नशे की लत जैसी समस्याओं पर अंकुश लगेगा. साथ ही, वास्तविक धन वाले गेम्स पर नियंत्रण से अवैध गतिविधियों और आर्थिक नुकसान को रोका जा सकेगा.
First Updated : Tuesday, 19 August 2025