पवन खेड़ा को SC से नहीं मिली राहत, कोर्ट ने पूछा- असम क्यों नहीं गए?

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अभी तक सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आरोपों से जुड़ा है, जिसके चलते खेड़ा के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी. उनकी एंटीसिपेटरी बेल पर रोक लगने से उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत से जुड़ी याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं, जिससे उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

दरअसल, पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट से उस आदेश को वापस लेने की मांग की थी, जिसमें तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली उनकी अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी गई थी. हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनके द्वारा दाखिल दस्तावेजों और प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी की.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, बेंच ने उठाए सवाल

पवन खेड़ा की याचिका पर जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने सुनवाई की.

यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आरोप लगाने से जुड़ा है, जिसके चलते खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. अग्रिम जमानत पर रोक के बाद उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है.

कोर्ट ने पूछा- असम क्यों नहीं गए?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा से सवाल किया कि उन्होंने तेलंगाना में याचिका क्यों दाखिल की, जबकि मामला असम से जुड़ा है.

कोर्ट ने कहा कि उनके आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों में दिए गए पते अलग-अलग हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई है.

ट्रांजिट बेल को लेकर बहस

खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि उन्होंने केवल ट्रांजिट बेल मांगी थी ताकि वे असम जाकर अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकें.

उन्होंने कहा कि कुछ दस्तावेज जल्दबाजी में गलत दाखिल हो गए थे, जिन्हें बाद में सुधार दिया गया.

दस्तावेजों पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह के दस्तावेज दाखिल करना गंभीर मामला है.

कोर्ट ने कहा, "आपने जाली और बनावटी डॉक्यूमेंट फाइल किए" और यह भी पूछा कि इसे “छोटी गलती” कैसे माना जा सकता है.

ट्रांजिट बेल बढ़ाने की मांग

सिंघवी ने कोर्ट से अनुरोध किया कि खेड़ा को मंगलवार तक ट्रांजिट बेल दी जाए, ताकि वे असम जाकर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सकें.

उन्होंने यह भी कहा कि तेलंगाना में याचिका जल्दबाजी में दाखिल की गई थी और बाद में सही दस्तावेज जमा कर दिए गए थे.

कोर्ट ने नहीं दी तत्काल राहत

हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और तत्काल कोई राहत देने से इनकार कर दिया.

खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट से बुधवार के उस आदेश को वापस लेने की मांग की थी, जिसमें तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी गई थी.

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