नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों अपने महत्वपूर्ण विदेश दौरे पर हैं और इसी क्रम में वह जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस पहुंच चुके हैं. छह दिन की इस यात्रा को भारत की कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. फ्रांस पहुंचने पर भारतीय समुदाय ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. प्रधानमंत्री ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी यात्रा की जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह दौरा कई महत्वपूर्ण बैठकों और कार्यक्रमों से भरा हुआ है, जो भारत के वैश्विक संबंधों को और मजबूत बनाने में मदद करेंगे.
फ्रांस के नीस शहर पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उनकी यात्रा केवल नीस तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह एवियन और पेरिस में भी कई कार्यक्रमों में भाग लेंगे. उन्होंने बताया कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और उसके प्रमुख सहयोगी देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ होने वाली बैठकों और विभिन्न कार्यक्रमों को लेकर उत्साहित हैं.
नीस में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों संयुक्त रूप से "भारत इनोवेट्स 2026" कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे. यह आयोजन भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम और नवाचार क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का बड़ा मंच माना जा रहा है. इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में भारतीय स्टार्टअप्स, निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञ भाग लेंगे. कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय उद्यमियों को वैश्विक निवेशकों से जोड़ना और नए अवसरों के द्वार खोलना है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी इस आयोजन में मौजूद रहेंगे.
भारत इनोवेट्स कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है. दोनों नेता भारत-फ्रांस संबंधों की समीक्षा करेंगे और उन्हें और मजबूत बनाने के लिए चर्चा करेंगे. बैठक में ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा सहयोग, तकनीकी विकास और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल रहने की संभावना है. दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर भी विचार किया जाएगा.
फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित होने वाले जी-7 सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री मोदी हिस्सा लेंगे. भारत भले ही जी-7 का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जाता रहा है. इस सम्मेलन में भारत के अलावा ब्राजील, मिस्र, केन्या और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर चर्चा के दौरान भारत अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को दुनिया के सामने रखेगा.
इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पहलू प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित मुलाकात को माना जा रहा है. दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात के बाद वैश्विक और द्विपक्षीय परिस्थितियों में कई बदलाव आए हैं. हाल के कुछ घटनाक्रमों के कारण भारत-अमेरिका संबंधों पर भी चर्चा तेज रही है. ऐसे में यदि यह बैठक होती है तो व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों पर महत्वपूर्ण बातचीत देखने को मिल सकती है.
18 जून को प्रधानमंत्री मोदी पेरिस में आयोजित होने वाले "वीवा टेक" सम्मेलन में भाग लेंगे. यह यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप आयोजनों में से एक माना जाता है. इस मंच पर दुनिया भर की अग्रणी टेक कंपनियां, निवेशक और स्टार्टअप संस्थापक मौजूद रहते हैं. प्रधानमंत्री मोदी यहां भारत की डिजिटल और तकनीकी उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर सकते हैं. इसके अलावा भारतीय समुदाय से भी उनकी मुलाकात की संभावना है.
फ्रांस दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया जाएंगे. यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि 1993 में स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री स्लोवाकिया का दौरा करेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, उद्योग और तकनीकी सहयोग को नई गति दे सकती है. साथ ही भारत की यूरोप में बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का भी यह महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है. First Updated : Sunday, 14 June 2026