ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें, पूर्व मंत्री मानस भुइयां के इस्तीफे से हिली टीएमसी

पार्टी के दिग्गज नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री और सात बार के विधायक मानस भुइंया ने टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. भुइंया ने अपना इस्तीफा सीधे ममता बनर्जी को भेजा है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

कोलकाता: पश्चिम बंगाल चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक संकट गहराता जा रहा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी के दिग्गज नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री और सात बार के विधायक मानस भुइंया ने टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. भुइंया ने अपना इस्तीफा सीधे ममता बनर्जी को भेजा है, जिससे राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है.

सिद्धांतों से भटकी पार्टी- भुइंया

मानस भुइंया ने आरोप लगाया कि वे जिन राजनीतिक मूल्यों और सिद्धांतों की वजह से कांग्रेस छोड़कर तृणमूल में शामिल हुए थे, पार्टी अब उन आदर्शों से दूर होती जा रही है. यही वजह है कि उन्होंने दल छोड़ने का फैसला किया. हाल के दिनों में बगावत करने वाले अन्य नेताओं के विपरीत, भुइंया ने ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी पर कोई व्यक्तिगत हमला या आरोप नहीं लगाया.

संन्यास से इनकार

मीडिया से मुखातिब होते हुए मानस भुइंया ने स्पष्ट किया कि इस इस्तीफे का मतलब राजनीति से संन्यास कतई नहीं है. वे राजनीतिक रूप से सक्रिय रहेंगे. उन्होंने अपने अगले कदम या रणनीति का खुलासा नहीं किया. इसके बाद से ही राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह अटकलें तेज हैं कि क्या अविभाजित मिदनापुर के यह कद्दावर नेता अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में घर वापसी करेंगे, या फिर बंगाल के बदलते माहौल में किसी नए राजनीतिक गुट का दामन थामेंगे.

सबांग का मजबूत किला ढहा

दशकों तक सबांग विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मानस भुइंया को इस बार के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. मिदनापुर क्षेत्र में जबरदस्त संगठनात्मक पकड़ रखने वाले भुइंया लंबे समय तक कांग्रेस में रहे थे. जहां उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं. साल 2016 में उनके टीएमसी में शामिल होने के बाद इस पूरे क्षेत्र में ममता बनर्जी की पार्टी को जमीनी मजबूती मिली थी. जिसके इनाम स्वरूप उन्हें राज्य कैबिनेट में मंत्री पद भी सौंपा गया था.

सांसदों की बगावत और टूटती टीएमसी

भुइंया का यह इस्तीफा ऐसे नाजुक समय पर आया है जब टीएमसी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद बागी हो चुके हैं और ममता बनर्जी के साथ अब केवल 8 सांसद ही खड़े दिखाई दे रहे हैं. चार राज्यसभा सांसदों ने भी अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, जिससे संसद में भी पार्टी कमजोर हुई है.

60 विधायकों का बागी 

15 साल तक पश्चिम बंगाल की सत्ता पर एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी को अब अपने विधायकों से ही चुनौती मिल रही है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद संभालने वाले ऋतब्रत बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वे ममता बनर्जी को तो अपना नेता मानते हैं, लेकिन संगठन में अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व उन्हें बिल्कुल स्वीकार नहीं है. ऋतब्रत बनर्जी के इस रुख को टीएमसी के करीब 60 विधायकों का खुला समर्थन प्राप्त है. जिससे ममता बनर्जी की राजनीतिक जमीन लगातार खिसकती नजर आ रही है.

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