पहाड़ों में तेज म्यूजिक बजाने वालों पर भड़की महिला ट्रैकर, वायरल वीडियो ने सिविक सेंस पर छेड़ी बहस

पहाड़ों में तेज आवाज में म्यूजिक बजाने वाले एक समूह को लेकर महिला ट्रैकर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. उनका कहना है कि इस तरह का व्यवहार न केवल ट्रैकिंग के अनुभव को खराब करता है, बल्कि प्रकृति के शांत माहौल को भी प्रभावित करता है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: पहाड़ों की खूबसूरती सिर्फ उनके मनमोहक नजारों में नहीं, बल्कि वहां की शांति और सुकून में भी बसती है. लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने इस शांति को लेकर नई बहस छेड़ दी है. वीडियो में एक महिला ट्रैकर पहाड़ों के बीच तेज आवाज में म्यूजिक बजाने वाले एक समूह पर नाराजगी जाहिर करती नजर आ रही हैं. उनका कहना है कि इस तरह का व्यवहार न केवल ट्रैकिंग के अनुभव को खराब करता है, बल्कि प्रकृति के शांत माहौल को भी प्रभावित करता है.

बेंगलुरु की रहने वाली ट्रैकर सौपिका ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह वीडियो साझा किया. वीडियो की शुरुआत में उन्होंने पहाड़ों के सुंदर दृश्य दिखाए और बताया कि लोग ऐसी जगहों पर शांति, सुकून और प्रकृति के करीब जाने के लिए आते हैं. लेकिन कुछ लोग वहां भी तेज म्यूजिक बजाकर माहौल को शोरगुल में बदल देते हैं. वीडियो में उन्होंने आसपास सुनाई दे रही ऊंची आवाज के म्यूजिक को भी रिकॉर्ड किया, ताकि लोग समझ सकें कि ट्रैकिंग के दौरान ऐसी स्थिति कितनी असहज हो सकती है.

दो घंटे तक बजता रहा म्यूजिक

सौपिका के अनुसार, जिस समूह की वजह से परेशानी हो रही थी, वह काफी लंबे समय से तेज आवाज में गाने चला रहा था. उन्होंने बताया कि उनके ट्रैकिंग ग्रुप ने संबंधित लोगों से म्यूजिक की आवाज कम करने का अनुरोध भी किया था. हालांकि अनुरोध के बावजूद कोई बदलाव नहीं हुआ और गाने लगातार बजते रहे. इससे केवल उनके समूह को ही नहीं, बल्कि आसपास मौजूद अन्य ट्रैकर्स को भी परेशानी का सामना करना पड़ा.

पहाड़ों को क्लब बनाने की जरूरत नहीं

वीडियो में महिला ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को तेज म्यूजिक, डांस और पार्टी का आनंद लेना है तो उसके लिए शहरों में पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं. क्लब, पब और अन्य मनोरंजन स्थलों में ऐसी गतिविधियां आसानी से की जा सकती हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोग पहाड़ों में शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव लेने आते हैं, तो वहां शहरी पार्टी जैसा माहौल बनाना कितना उचित है. उनके मुताबिक, ऐसे स्थानों की खासियत ही उनकी प्राकृतिक शांति होती है.

ट्रैकिंग का उद्देश्य समझना जरूरी

सौपिका ने कहा कि ट्रैकिंग केवल एक एडवेंचर गतिविधि नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ जुड़ने का एक माध्यम भी है. लोग पहाड़ों पर इसलिए जाते हैं ताकि कुछ समय के लिए शहरों के शोर और भागदौड़ से दूर रह सकें. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोस्तों के साथ बातचीत करना, हंसना-मजाक करना या यात्रा का आनंद लेना पूरी तरह सामान्य बात है. लेकिन जब किसी की गतिविधियां दूसरों के अनुभव और प्राकृतिक वातावरण को प्रभावित करने लगें, तब यह चिंता का विषय बन जाता है.

सिविक सेंस की कमी पर जताई चिंता

वीडियो के दौरान सौपिका ने सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के व्यवहार को लेकर भी चिंता व्यक्त की. उनका मानना है कि कई लोग यह नहीं सोचते कि उनकी गतिविधियों का असर आसपास मौजूद अन्य लोगों पर भी पड़ सकता है. उन्होंने इसे नागरिक जिम्मेदारी और सिविक सेंस की कमी से जोड़ते हुए कहा कि समाज में इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है. उनके अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर हर व्यक्ति को अपने व्यवहार की जिम्मेदारी समझनी चाहिए.

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कई यूजर्स ने महिला की बात का समर्थन करते हुए कहा कि पहाड़ों और प्राकृतिक स्थलों पर शांति बनाए रखना जरूरी है. वहीं कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत पसंद का मामला भी बताया. 

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