नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में 'सेवा तीर्थ' परिसर का उद्घाटन कर देश की प्रशासनिक संरचना को एक नई पहचान दी. यह परिसर अब प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय का संयुक्त केंद्र बनेगा. इस नई शुरुआत को केंद्र सरकार ने शासन व्यवस्था में एक अहम कदम बताया है.
नई इमारतों को इस तरह तैयार किया गया है कि वे भारत की प्रशासनिक क्षमता और समन्वित कार्यप्रणाली को दर्शाती हैं. परिसर की दीवार पर अंकित आदर्श वाक्य 'नागरिक देवो भव' शासन की उस भावना को रेखांकित करता है, जिसमें नागरिकों को सर्वोपरि माना गया है.
'सेवा तीर्थ' परिसर में अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय एक ही स्थान पर कार्य करेंगे. इससे पहले ये तीनों प्रमुख संस्थान अलग-अलग भवनों में संचालित होते थे. नए परिसर के माध्यम से समन्वय और कार्यकुशलता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है.
केंद्र सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परिसर भारत की आधुनिक प्रशासनिक शासन संरचना का प्रतीक है और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगा.
परिसर की दीवार पर उकेरा गया आदर्श वाक्य 'नागरिक देवो भव' शासन की मूल भावना को प्रदर्शित करता है. यह संदेश स्पष्ट करता है कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की सेवा और उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति है.
प्रधानमंत्री ने 13 फरवरी को इस परिसर का उद्घाटन किया. यह तारीख ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 13 फरवरी 1931 को नई दिल्ली को औपचारिक रूप से भारत की आधुनिक राजधानी के रूप में स्थापित किया गया था. इस वर्ष उस ऐतिहासिक घटना के 95 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 'सेवा तीर्थ' का उद्घाटन किया गया.
सेवा तीर्थ परिसर के साथ प्रधानमंत्री मोदी कर्तव्य भवन 1 और 2 का भी उद्घाटन करेंगे. इन भवनों में कई प्रमुख मंत्रालयों के विभाग स्थापित किए जाएंगे. इनमें वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन और उर्वरक मंत्रालय तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय शामिल हैं. First Updated : Friday, 13 February 2026