जवाहर लाल नेहरू का सबसे बड़ा रिकॉर्ड तोड़ने वाले हैं PM मोदी, 9 जून 2026 को रचेंगे नया कीर्तिमान
13 मई 1952 को स्वतंत्र भारत की पहली निर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक आयोजित हुई थी. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लंबे कार्यकाल की तुलना फिर सुर्खियों में आ गई है.

नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 13 मई की तारीख बेहद खास मानी जाती है. यही वह दिन था जब स्वतंत्र भारत की पहली निर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक आयोजित हुई थी. इस ऐतिहासिक मौके को याद करते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा किया, जिसके बाद देश में लोकतांत्रिक इतिहास और प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई. खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लंबे कार्यकाल की तुलना फिर सुर्खियों में आ गई है.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 13 मई को अपने संदेश में लिखा कि 13 मई 1952 भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक दिन था. इसी दिन पहली निर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक हुई थी. उन्होंने कहा कि यह दिन संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनभागीदारी पर आधारित नए भारत की मजबूत नींव का प्रतीक है. उनकी इस पोस्ट ने देश के लोकतांत्रिक सफर और स्वतंत्र भारत में चुनी गई सरकारों की यात्रा पर लोगों का ध्यान फिर से केंद्रित कर दिया.
कब हुआ था स्वतंत्र भारत का पहला आम चुनाव?
आजादी के बाद भारत में पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 के बीच आयोजित किया गया था. यह चुनाव भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शुरुआत माना जाता है. उस समय लोकसभा की कुल 489 सीटों पर मतदान हुआ था. चुनाव में कांग्रेस पार्टी को भारी बहुमत मिला और उसने 364 सीटों पर जीत दर्ज की. इसके बाद 17 फरवरी 1952 को पहली लोकसभा का औपचारिक गठन किया गया. फिर 13 मई 1952 को स्वतंत्र भारत की पहली निर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक आयोजित हुई. देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान में मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए इस बैठक को बुलाया था.
जवाहरलाल नेहरू के नाम है सबसे लंबा लगातार निर्वाचित कार्यकाल
पहले आम चुनाव में जीत के बाद जवाहरलाल नेहरू को कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना गया. इसके बाद उन्होंने 14 मई 1952 को स्वतंत्र भारत की पहली निर्वाचित सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. नेहरू लगातार 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहे. इस तरह वे करीब 12 साल और 14 दिन तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे. यह रिकॉर्ड आज भी भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है.
पीएम मोदी इस रिकॉर्ड को तोड़ने के करीब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. इसके बाद 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उनके नेतृत्व में एनडीए को जीत मिली और वे लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने. अगर उनका कार्यकाल इसी तरह जारी रहता है, तो 9 जून 2026 को वे लगातार 12 साल और 15 दिन तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रह चुके होंगे. इसके साथ ही वे जवाहरलाल नेहरू का सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड पीछे छोड़ देंगे. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह भारतीय राजनीति में एक बड़ा ऐतिहासिक क्षण माना जाएगा.
1947 में कैसे प्रधानमंत्री बने थे नेहरू?
हालांकि जवाहरलाल नेहरू पहली बार 15 अगस्त 1947 को भारत के प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन उस समय देश में आम चुनाव नहीं हुए थे. उन्हें कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया था. इतिहासकारों के मुताबिक, महात्मा गांधी की भूमिका भी नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने में काफी अहम रही थी. 1947 से लेकर 1952 तक नेहरू मनोनीत प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करते रहे. बाद में 1952 के आम चुनाव में जीत के बाद वे लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री बने.


