पेट्रोल-डीजल के बाद अब LPG संकट, PM मोदी ने बुलाई हाई-लेवल मीटिंग; अधिकारियों को दिए ये बड़े निर्देश

आज पीएम मोदी ने उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. जिसमें पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ईंधन, ऊर्जा और आवश्यक संसाधनों की तैयारियों की समीक्षा की गई.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ईंधन, ऊर्जा और आवश्यक संसाधनों की तैयारियों की समीक्षा की गई. इसमें पेट्रोलियम, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर फोकस रहा. 

बैठक का मुख्य उद्देश्य

बैठक का फोकस था कि आपूर्ति श्रृंखला बिना रुकावट चले, लॉजिस्टिक्स मजबूत रहे और देशभर में आवश्यक संसाधनों का वितरण सुचारू हो. वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने पीएम को वर्तमान स्टॉक, आयात निर्भरता और किसी भी संभावित रुकावट से निपटने के लिए तैयारियों के बारे में जानकारी दी. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह समीक्षा जरूरी हो गई है.

ईंधन कीमतें और गैस की कमी की चिंता

बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें ज्यादातर स्थिर है. मुंबई में पेट्रोल करीब 103 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90 रुपये के आसपास है. हालांकि, हाल में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से प्रीमियम पेट्रोल में 2 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. सबसे बड़ी चिंता प्राकृतिक गैस और एलपीजी की कमी की है. 

भारत खाड़ी क्षेत्र से एलपीजी और प्राकृतिक गैस का बड़ा आयात करता है. होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव से जहाजों में देरी हो रही है, कई टैंकर फंस गए हैं. इससे एलपीजी की खपत तेजी से घटी है.

जमीन पर दिखने लगा असर 

कई शहरों में गैस एजेंसियों और सीएनजी स्टेशनों के बाहर लंबी कतारें लग रही है. लोग घंटों इंतजार कर रहे हैं. कुछ इलाकों में पैनिक खरीदारी और जमाखोरी से स्थिति बिगड़ रही है. विजयवाड़ा जैसे शहरों में सीएनजी पर चलने वाले ऑटो चालक घंटों इंतजार कर रहे हैं. महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में एलपीजी वितरण केंद्रों पर भीड़ और तनाव देखा गया है. 

सरकार ने घरेलू एलपीजी को प्राथमिकता दी है और आवश्यक क्षेत्रों को ज्यादा आवंटन बढ़ाया है. व्यावसायिक उपयोग पर कुछ पाबंदियां लगी है, जिससे कई रेस्तरां आंशिक या पूरी तरह बंद हो गए हैं.

पीएम मोदी के निर्देश

प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि कमी न हो, कीमतें नियंत्रित रहें और लोगों में घबराहट न फैले. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगर पश्चिम एशिया का संघर्ष और बढ़ा तो आकस्मिक योजनाओं को मजबूत किया जाए. 

भारत खाड़ी से ऊर्जा का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. फिलहाल कोई बड़ा संकट नहीं है, लेकिन गैस आपूर्ति में शुरुआती दबाव दिख रहा है. सरकार अलर्ट मोड पर है.

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