भगवंत मान सरकार का ऐतिहासिक फैसला, 65 हजार से ज्यादा कर्मचारी होंगे रेगुलर

पंजाब मंत्रिमंडल ने कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए ठेकेदारी व्यवस्था को खत्म करने और हजारों कामगारों को स्थायी रोजगार की दिशा में आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है. साथ ही कई अहम प्रशासनिक फैसले भी लिए गए.

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चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब मंत्रिमंडल ने कर्मचारियों के हित में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए दशकों पुरानी ठेकेदारी आधारित रोजगार व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मंत्रिमंडल ने सरकारी विभागों में कार्यरत 65,000 से अधिक कामगारों को रेगुलर करने की प्रक्रिया का रास्ता तैयार करने वाली रूपरेखा को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के जरिए सरकार और कर्मचारियों के बीच सीधा संबंध स्थापित किया जाएगा, जिससे वर्षों से बिना स्थायी दर्जे के काम कर रहे कर्मचारियों को रोजगार सुरक्षा, सम्मान और स्थायी सेवा की दिशा में स्पष्ट अवसर मिल सकेगा.

मंत्रिमंडल ने इस बदलाव को लागू करने के लिए दो नए अध्यादेशों और दो महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दी है. इनमें आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकारी रोजगार प्रणाली के दायरे में लाने और रेगुलर नियुक्ति के लिए स्पष्ट प्रक्रिया तैयार करने का प्रावधान शामिल है. सरकार का कहना है कि अब सरकारी विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों और निजी ठेकेदारों के बीच की मध्यस्थ व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा.

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कर्मचारियों का हक

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब के 65,000 से अधिक कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों ने राज्य की सेवा में अपने कई वर्ष लगाए हैं. सरकार ने इस फैसले के माध्यम से उन्हें उनका अधिकार देने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा, “अब कोई ठेकेदार कर्मचारियों और सरकार के बीच नहीं होगा. कर्मचारियों को सीधे रोजगार, सम्मान और स्थायी भविष्य का रास्ता मिलेगा.”

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सनल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्चुअल एंगेजमेंट) बिल, 2026’ के तहत पांच साल की निरंतर सेवा पूरी करने वाले ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों को सीधे सरकारी ठेके के तहत लाया जाएगा. जोखिम वाले क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह अवधि तीन साल रखी गई है.

65,000 से अधिक कामगार होंगे लाभान्वित

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस सुधार के दायरे में 51 विभागों के कुल 65,048 आउटसोर्स कर्मचारी शामिल होंगे और पहले चरण में 26,000 से अधिक कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा. जोखिम भरे कार्यों से जुड़े कर्मचारियों को प्राथमिकता देते हुए नीति के तहत तेजी से प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.

इनमें फायर सर्विसेज, बिजली विभाग के लाइनमैन, सीवर वर्कर, सफाई कर्मचारी और फील्ड शिकायत स्टाफ जैसे कर्मचारी शामिल हैं. विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को भी इस नीति का लाभ मिलेगा, जिनमें बिजली क्षेत्र, स्थानीय निकाय, स्कूल शिक्षा, परिवहन, स्वास्थ्य, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता, कृषि, जेल, तकनीकी शिक्षा, पीडब्ल्यूडी और मेडिकल शिक्षा विभाग शामिल हैं.

कर्मचारियों के लिए नए अधिकार और सुविधाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों का वेतन अब किसी एजेंसी या ठेकेदार की कटौती के बिना सीधे उनके बैंक खातों में जाएगा. इसके अलावा कर्मचारियों को हर वर्ष कानूनी प्रसूति लाभ और 10 दिन की कैजुअल छुट्टी मिलेगी. बायोमेट्रिक हाजिरी और आईएचआरएमएस प्रणाली के तहत उन्हें पारदर्शी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि किसी कर्मचारी को बिना लिखित कारण और सुनवाई का अवसर दिए हटाया नहीं जाएगा.

मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल की मंजूरी के 45 दिनों के भीतर इस फैसले को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. अमला और वित्त विभाग चरणबद्ध तरीके से पात्र कर्मचारियों को अधिसूचित करेंगे. इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय अधिकृत समिति बनाई जाएगी, जो पूरे कार्यान्वयन की निगरानी करेगी.

डीए और पेंशन बकाए पर फैसला: मंत्री पैनल का पुनर्गठन

मंत्रिमंडल ने संशोधित वेतन, पेंशन और छुट्टियों से जुड़े बकायों के समाधान के लिए कैबिनेट सब-कमेटी का पुनर्गठन भी मंजूर किया है. इस समिति में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर शामिल होंगे. समिति 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2021 के दौरान हुए वेतन और पेंशन बकायों तथा 1 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2024 तक के डीए और महंगाई राहत से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करेगी.

भ्रष्टाचार मामलों की तेज सुनवाई के लिए 7 विशेष अदालतें

भ्रष्टाचार के मामलों का तेजी से निपटारा सुनिश्चित करने के लिए पंजाब मंत्रिमंडल ने राज्य में 7 विशेष अदालतों की स्थापना को मंजूरी दे दी है. इनमें से तीन अदालतें एसएएस नगर में स्थापित होंगी, जबकि जालंधर, लुधियाना, अमृतसर और पटियाला में एक-एक विशेष अदालत बनाई जाएगी. साथ ही अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के 7 पद और सहायक स्टाफ के 63 पद सृजित किए जाएंगे.

न्यायिक सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी

मंत्रिमंडल ने पंजाब सुपीरियर जुडिशियल सर्विस रूल्स, 2007 के नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दे दी है. इन बदलावों का उद्देश्य राज्य में कार्यरत उच्च न्यायिक अधिकारियों को पदोन्नति संबंधी लाभ देना और न्यायिक सेवाओं में करियर प्रगति के अवसरों को मजबूत करना है. First Updated : Sunday, 31 May 2026