जयपुर: चंबल के बीहड़ का कभी 'बादशाह' कहे जाने वाले कुख्यात पूर्व डकैत जगन गुर्जर की सोमवार को अजमेर सेंट्रल जेल में हत्या कर दी गई. अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने वारदात की पुष्टि करते हुए बताया कि कुलदीप जगिना हत्याकांड के आरोपी विष्णु गुर्जर ने जेल के भीतर इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम दिया है. राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए सिरदर्द रहे जगन गुर्जर के खात्मे के साथ ही चंबल के एक बड़े आपराधिक अध्याय का अंत हो गया है.
जीजा की हत्या का बदला!
जगन गुर्जर के डकैत बनने की कहानी प्रतिशोध से जुड़ी है. मूल रूप से धौलपुर जिले के बसई डांग का रहने वाला जगन साल 1994 तक एक सामान्य जीवन जी रहा था, लेकिन इसी साल उसके जीजा की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस हत्याकांड का बदला लेने के लिए जगन ने कानून हाथ में लिया और अपने चार भाइयों के साथ मिलकर एक गैंग बना ली. देखते ही देखते उसने बीहड़ में अपना सिक्का जमा लिया. जगन और उसकी गैंग के खिलाफ तीनों राज्यों में हत्या, रंगदारी, अपहरण और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में 100 से अधिक मुकदमे दर्ज थे.
जब वसुंधरा राजे के महल को उड़ाने की दी थी धमकी
जगन गुर्जर का दुस्साहस इस कदर था कि उसने गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के महल (बंगले) को उड़ाने की खुली धमकी दे डाली थी. इस धमकी के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और जगन पर इनाम की राशि बढ़ाकर 11 लाख रुपये कर दी गई. जब पुलिस का चौतरफा दबाव बढ़ा, तो जगन ने 31 जनवरी 2009 को कैमरी गांव में कांग्रेस नेता सचिन पायलट की मौजूदगी में अपने 25 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया था. दिलचस्प बात यह है कि तीन राज्यों की पुलिस उसे कभी सीधे गिरफ्तार नहीं कर पाई, उसने हर बार खुद सरेंडर का रास्ता चुना.
तीन शादियां और प्रेमिका कोमेश की दिलचस्प दास्तान
जगन गुर्जर ने अपने जीवन में तीन शादियां की थीं. उसकी पहली पत्नी ममता गुर्जर ने 2008 में धौलपुर उपचुनाव भी लड़ा था. वहीं, उसकी प्रेमिका से पत्नी बनी कोमेश गुर्जर की कहानी बेहद फिल्मी है. बीहड़ में एक मुठभेड़ के दौरान कोमेश घायल हो गई थी, तब जगन ने अपनी जान जोखिम में डालकर उसे धौलपुर के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया था. पुलिस ने जब कोमेश को जेल भेजा, तो जगन उसके बिना नहीं रह सका. उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण के लिए यह शर्त रख दी कि उसे कोमेश के साथ ही उसी जेल में रखा जाए. साल 2022 में बाड़ी विधायक गिर्राज मलिंगा को धमकी देने के बाद वह आखिरी बार चर्चा में आया था, जिसके बाद 7 फरवरी 2022 को उसने करौली पुलिस के सामने सरेंडर किया था, और तब से वह जेल में ही बंद था. First Updated : Tuesday, 30 June 2026