कोटा मेडिकल कॉलेज में मातम, ऑपरेशन के बाद 2 प्रसूताओं की मौत; 4 की किडनी फेल

राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत और चार महिलाओं की किडनी फेल होने के मामले ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है. घटना के बाद सरकार ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई करते हुए जांच तेज कर दी है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

कोटा: राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने का मामला अब गंभीर चिकित्सा और प्रशासनिक संकट में बदल गया है. अब तक दो महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि चार अन्य प्रसूताओं का इलाज ICU और नेफ्रोलॉजी वार्ड में जारी है. इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन, जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

परिजनों ने अस्पताल पर गलत दवा देने और मेडिकल रिकॉर्ड गायब करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. वहीं, सरकार ने मामले की हाई लेवल जांच शुरू कर दी है और जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कोटा भेजी गई है. इस बीच लापरवाही के आरोप में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई भी की गई है.

सरकार का बड़ा एक्शन, डॉक्टर और नर्स सस्पेंड

9 मई 2026 को राज्य सरकार ने मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए डॉक्टर नवनीत कुमार और दो नर्सों गुरजोत कौर व निमेश वर्मा को सस्पेंड कर दिया.

इसके अलावा कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत डॉक्टर श्रद्धा उपाध्याय की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं. वहीं यूनिट हेड डॉ. बीएल पटीदार और डॉ. नेहा सीहरा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है कि उनकी निगरानी में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई.

सरकार ने साफ किया है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहुंचे पीड़ित परिवार के घर

घटना ने राजनीतिक स्तर पर भी हलचल बढ़ा दी है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहले अस्पताल पहुंचे और बाद में मृतका ज्योति के घर जाकर परिवार से मुलाकात की.

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दो प्रसूताओं की मृत्यु अत्यंत हृदय विदारक और दुखद है. आज क्रेशर बस्ती में पीड़ित परिवार से मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की. परिजनों को आश्वस्त किया है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी."

कांग्रेस ने बनाई जांच समिति

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी मामले में चार सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की है.

इस समिति में पूर्व मंत्री परसादी लाल मीणा, विधायक डूंगरराम गेदर, महासचिव पुष्पेन्द्र भारद्वाज और डॉ. विकास महला को शामिल किया गया है. समिति को तीन दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.

मेडिकल रिपोर्ट में सामने आए गंभीर संकेत

गंभीर हालत में भर्ती प्रसूता रागिनी की मेडिकल रिपोर्ट में कई चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों किडनियों में 'Increased Echogenicity' पाया गया है, जो गंभीर संक्रमण या किडनी डैमेज की ओर संकेत करता है. इसके अलावा पेट में खून जमा होने, 'Blood on aspiration' और लिवर बढ़ने जैसे लक्षण भी मिले हैं.

रिपोर्ट के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि किसी जहरीले तत्व या गलत दवा का असर शरीर के मुख्य अंगों पर पड़ा.

परिजनों ने लगाए फाइलें गायब करने के आरोप

मृतका ज्योति के पति रवि और अन्य परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद एक इंजेक्शन लगाए जाने के बाद मरीजों की हालत बिगड़ी. उन्होंने आरोप लगाया कि अब अस्पताल प्रशासन पुरानी फाइलें हटाकर नई पर्चियां बनवा रहा है.

परिजनों ने मांग की है कि पुरानी मेडिकल फाइलें सामने लाई जाएं ताकि पता चल सके कि कौन सी दवा दी गई थी.

अधिकारियों के बयान में दिखा विरोधाभास

जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने कहा कि भर्ती के समय महिलाओं की स्थिति सामान्य थी और बाद में अचानक तबीयत बिगड़ने के कारणों की जांच की जा रही है.

उन्होंने बताया कि दवाओं के सैंपल FSL जांच के लिए भेजे गए हैं.

वहीं मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. नीलेश कुमार जैन ने शुरुआती जांच में स्टाफ को क्लीन चिट देते हुए कहा कि अब तक किसी मानवीय लापरवाही के प्रमाण नहीं मिले हैं और यह मेडिकल कॉम्प्लिकेशन भी हो सकता है.

जयपुर से पहुंची विशेषज्ञों की टीम

राज्य सरकार के निर्देश पर जयपुर के SMS अस्पताल और एम्स से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कोटा पहुंच चुकी है.

संभागीय आयुक्त अनिल कुमार ने अस्पताल का दौरा कर मरीजों की स्थिति का जायजा लिया. प्रशासन ने फिलहाल मरीजों को जयपुर रेफर नहीं करने का फैसला लिया है.

अस्पताल में पसरा डर और सन्नाटा

घटना के बाद अस्पताल में डर और तनाव का माहौल बना हुआ है. ICU और डायलिसिस यूनिट में भर्ती महिलाओं का इलाज विशेषज्ञों की निगरानी में जारी है.

वहीं उन नवजात बच्चों को अलग वार्ड में शिफ्ट किया गया है, जिनकी मांएं या तो इस दुनिया में नहीं रहीं या जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं.

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