नई दिल्ली: देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को होने वाले चुनावों ने सियासी हलचल तेज कर दी है. बदले हुए विधानसभा समीकरणों के बीच यह चुनाव सिर्फ उच्च सदन की सीटों का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में ताकत के नए संतुलन की परीक्षा भी बन गया है.
जहां एक ओर बीजेपी और कांग्रेस को पहले से अधिक सीटें मिलने के संकेत हैं, वहीं कई क्षेत्रीय दलों के लिए यह चुनाव अस्तित्व की चुनौती बनता दिख रहा है. लालू यादव की आरजेडी, शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के लिए हालात मुश्किल नजर आ रहे हैं, जबकि बीआरएस और वाम दलों के सफाए की आशंका जताई जा रही है.
महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6, बिहार और पश्चिम बंगाल की 5-5, ओडिशा की 4, असम की 3, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की 2-2 तथा हिमाचल प्रदेश की 1 सीट पर मतदान होना है.
इन 37 सीटों में फिलहाल एनडीए के पास 15 और इंडिया ब्लॉक के पास 18 सीटें हैं, जबकि 4 सीटें अन्य दलों के पास हैं. लेकिन मौजूदा राजनीतिक समीकरण संकेत दे रहे हैं कि चुनाव के बाद तस्वीर बदल सकती है.
संभावनाओं के अनुसार एनडीए की सीटें 15 से बढ़कर 18 तक पहुंच सकती हैं, जबकि इंडिया ब्लॉक की सीटें 18 से घटकर 14 या 15 रह सकती हैं.
एनडीए की मौजूदा 15 सीटों में बीजेपी के 9, जेडीयू के 2, AIADMK, आरएलएम और आरपीआई के एक-एक सदस्य शामिल हैं. चुनाव के बाद बीजेपी की सीटें 12 तक पहुंचने की संभावना है, जबकि जेडीयू और AIADMK अपनी स्थिति बरकरार रख सकती हैं.
वहीं इंडिया ब्लॉक की 18 सीटों में कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके के चार-चार सदस्य हैं, जबकि आरजेडी के 2, शिवसेना (यूबीटी) और सीपीआईएम के एक-एक सदस्य हैं. अनुमान है कि कांग्रेस को एक सीट का लाभ मिल सकता है, लेकिन सहयोगी दलों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.
बिहार की 5 सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प है. एक सीट के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है. मौजूदा विधानसभा स्थिति में एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जबकि महागठबंधन के पास 35 और 7 अन्य विधायक हैं.
चार सीटें एनडीए आसानी से जीत सकता है, जबकि पांचवीं सीट पर सियासी गणित उलझा हुआ है. महागठबंधन को एक सीट जीतने के लिए 6 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी. ऐसे में आरजेडी के लिए एक सीट बचाना भी चुनौतीपूर्ण दिख रहा है.
महाराष्ट्र की 7 सीटों में से 6 सीटें एनडीए के खाते में जाती दिख रही हैं. एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों की जरूरत है. बीजेपी (131), शिंदे गुट (57) और अजित पवार गुट (40) मिलाकर एनडीए के पास 228 विधायक हैं.
दूसरी ओर शरद पवार की एनसीपी (एसपी) के 10, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 20 और कांग्रेस के 16 विधायक हैं. तीनों दल मिलकर एक उम्मीदवार जिता सकते हैं, लेकिन उन्हें एक अतिरिक्त विधायक की जरूरत होगी.
आदित्य ठाकरे ने दावा किया है, "विधायकों की संख्या को देखते हुए, राज्यसभा की सीट पर शिवसेना का हक बनता है."
शरद पवार भी राज्यसभा में वापसी की कोशिश में हैं, लेकिन नंबर गेम उनके पक्ष में नहीं दिख रहा. ऐसे में महाविकास अघाड़ी के सामने कठिन फैसला खड़ा है.
बदले हुए समीकरणों के बीच वाम दलों और बीआरएस के राज्यसभा से पूरी तरह बाहर होने की आशंका जताई जा रही है. यदि ऐसा होता है तो उच्च सदन में इन दलों की आवाज समाप्त हो सकती है. First Updated : Saturday, 21 February 2026