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अमेरिका और यूरोप की दीवारें उन्हें ही सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाएंगी, जयशंकर का सीधा इशारा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कहा कि अमेरिका और यूरोप जैसे देश यदि सीमा पार पेशेवरों की आवाजाही पर कठोर रुकावटें खड़ी करेंगे, तो सबसे बड़ा नुकसान उन्हें ही होगा। उन्नत विनिर्माण के दौर में प्रतिभा की मांग बढ़ेगी, बाधाएं नहीं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

New Delhi: जयशंकर ने कहा कि जिन देशों ने पेशेवरों की आवाजाही पर ज्यादा दीवारें खड़ी की हैं, वे लंबे समय में नुकसान झेलेंगे। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में टैलेंट ही सबसे बड़ी ताकत है। देशों को समझना होगा कि प्रतिभा साझा करने से ही विकास होता है। उन्होंने कहा कि भारत लगातार दुनिया को बता रहा है कि सीमा पार काम करने वाले लोग किसी देश की कमजोरी नहीं बल्कि उसकी मजबूती होते हैं। यह सोच बदलना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

क्यों बढ़ रही हैं बाधाएं?

जयशंकर ने कहा कि इमिग्रेशन मुद्दे को अक्सर राजनीति में गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। कुछ देश वोट बैंक के डर से पेशेवरों की एंट्री रोकते हैं। उन्होंने बताया कि कई विकसित देशों में उद्यमियों और तकनीकी विशेषज्ञों की राय बिल्कुल उलट है। वे चाहते हैं कि ज्यादा कुशल लोग आएं और अर्थव्यवस्था मजबूत बने। लेकिन राजनीति के कारण यह रास्ता बार-बार रुक जाता है। यह विरोध आगे चलकर उन्हीं देशों को महंगा पड़ेगा।

H-1B वीज़ा पर सख्ती क्यों?

ट्रंप सरकार ने हाल ही में H-1B वीज़ा पर भारी शुल्क लगाए हैं। नियम भी सख्त किए गए हैं ताकि विदेशी प्रोफेशनल आसानी से अमेरिका न पहुंच सकें। जयशंकर ने बिना नाम लिए कहा कि यह सोचना गलत है कि बाहर से आए लोग नौकरियां छीनते हैं। असल वजह यह है कि कई देशों ने अपनी फैक्ट्रियां बाहर भेज दीं। इसलिए नौकरियां घटीं, लोग नहीं। उन्होंने साफ कहा कि लोग न जाएंगे तो काम ही बाहर चला जाएगा।

भारत को क्या करना चाहिए?

जयशंकर बोले कि भारत को दुनिया को लगातार यह समझाना होगा कि सीमा पार काम करने वाले लोग पारस्परिक लाभ पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर तकनीक और व्यापार से जुड़े लोग ही इस बात का समर्थन करते हैं। लेकिन राजनीतिक नेतृत्व कई बार इसे रोक देता है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने हितों को मजबूती से global मंच पर रखना होगा ताकि भारतीय पेशेवरों को सही अवसर मिलें।

क्यों जरूरी है लीगल मोबिलिटी?

जयशंकर ने कहा कि दुनिया globalization की तरफ बढ़ रही है, लेकिन mobility पर चर्चा कम होती है। व्यापार पर सभी बात करते हैं, लेकिन काम और प्रतिभाओं की आवाजाही को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सिर्फ पिछले साल भारत में 135 अरब डॉलर का remittance आया। यह भारत के अमेरिका को किए गए कुल निर्यात का लगभग दोगुना है। यह दिखाता है कि प्रतिभा की आवाजाही कितनी जरूरी है।

अवैध आवाजाही पर सख्त चेतावनी

जयशंकर ने कहा कि अवैध migration का रिश्ता मानव तस्करी और अपराध से जुड़ा होता है। यह काम राजनीतिक और अलगाववादी एजेंडा चलाने वाले गिरोहों के हाथ में चला जाता है। उन्होंने कहा कि कानूनी मार्ग ही सही रास्ता है। देशों को मिलकर अवैध नेटवर्क तोड़ने होंगे। उन्होंने कहा कि भविष्य का दौर टैलेंट, कानून और वैश्विक सहयोग पर ही टिकेगा। किसी भी देश के लिए दीवारें खड़ी करना समाधान नहीं है।

आखिर कौन होगा लूज़र?

जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि उन्नत विनिर्माण की तरफ बढ़ते देशों को ज्यादा प्रतिभा की जरूरत होगी, कम नहीं। अगर वे अपनी सीमाएं और सख्त करेंगे तो दुनिया नहीं, वे खुद सबसे बड़े लूज़र साबित होंगे। उन्होंने कहा कि टैलेंट को रोकना, विकास को रोकना है और आज की दुनिया में कोई भी देश अकेले नहीं चल सकता।

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03 December 2025, 06:48 PM IST

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