नई दिल्ली: गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. यह मामला हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान द्वारा दर्ज कराई गई मानहानि एफआईआर से जुड़ा है.
अदालत के इस फैसले के बाद खेड़ा के सामने अब आत्मसमर्पण कर नियमित जमानत लेने का विकल्प बचा है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर चुका है, जिससे उनकी कानूनी स्थिति और जटिल हो गई है.
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया. इससे पहले भारत का सर्वोच्च न्यायालय भी इस मामले में राहत देने से इनकार कर चुका था.
10 अप्रैल को तेलंगाना हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह की अग्रिम जमानत दी थी. हालांकि, असम पुलिस ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी.
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, जिससे ट्रांजिट बेल प्रभावी रूप से समाप्त हो गई.
17 अप्रैल को अदालत ने इस स्टे को हटाने से भी इनकार कर दिया और अंतरिम संरक्षण बढ़ाने की मांग को खारिज कर दिया.
असम विधानसभा चुनाव से पहले पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुयान के पास कई देशों के पासपोर्ट हैं, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और एंटीगुआ-बारबुडा शामिल हैं.
उन्होंने यह भी दावा किया था कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं, जो 2021-22 के बीच विदेशी नागरिकता लेने की ओर इशारा करते हैं. साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री पर चुनावी हलफनामे में इन जानकारियों को छिपाने का आरोप लगाया था.
हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें "मनगढ़ंत" और "एआई द्वारा निर्मित झूठ" बताया.
उन्होंने कहा कि इनका मकसद मतदाताओं को गुमराह करना है और यह दावे एक पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल से जुड़े हैं.
इन आरोपों के बाद रिनिकी भुयान ने पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और दीवानी दोनों तरह की मानहानि की कार्यवाही शुरू की है. First Updated : Friday, 24 April 2026