सिक्किम: सिक्किम में निर्माणाधीन सुरंग के अंदर हुए जोरदार विस्फोट के बाद राहत और बचाव अभियान के बीच मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है. दक्षिण सिक्किम के नामची जिले में सुरंग का एक हिस्सा ढहने के बाद 25 मजदूर मलबे और जहरीली गैस के बीच फंस गए थे. मंगलवार तक 12 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी, जबकि 13 अन्य अब भी लापता बताए गए. इसी बीच, बचाव दल ने सुरंग के अंदर कुछ और शव दिखाई देने का दावा किया है, लेकिन जिला प्रशासन ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
यह हादसा सोमवार दोपहर करीब 1 बजे के बाद समरदुंग इलाके में एनएचपीसी की तीस्ता चरण-VI जलविद्युत परियोजना के लिए बनाई जा रही सुरंग में हुआ. घटना के बाद सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया. हालांकि कुछ मीडिया एजेंसियों द्वारा 20 मजदूरों की मौत और 5 के लापता होने की बात कही जा रही है. हालांकि, अभी तक 20 मजदूरों की मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
नामची की जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बताया कि मंगलवार शाम तक सुरंग से 12 शव बाहर निकाले जा चुके थे. 13 मजदूरों की तलाश अब भी जारी थी. अधिकारियों के अनुसार, बरामद शवों में से सात की पहचान की जा चुकी है. मृतकों में पश्चिम बंगाल, पंजाब, असम और उत्तराखंड से आए प्रवासी मजदूर शामिल बताए जा रहे हैं. प्रशासन ने कहा है कि बचाव अभियान को रात तक जारी रखा जाएगा और बुधवार सुबह इसे फिर से शुरू किया जाएगा.
हालांकि, पश्चिम बंगाल से पहुंचे खनन सुरक्षा दल के कुछ सदस्यों ने सुरंग के भीतर आठ और शव दिखाई देने का दावा किया. यदि यह दावा सही साबित होता है तो हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. फिलहाल नामची जिला प्रशासन और पुलिस ने केवल 12 मौतों की पुष्टि की है.
हादसे के बाद सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के साथ घटनास्थल का दौरा किया. मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि हादसे के कारणों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल से विशेष खनन बचाव दल घटनास्थल पर पहुंच चुका है और सुरंग में फंसे मजदूरों की तलाश में स्थानीय टीमों की मदद कर रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री तमांग से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली. केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिया गया है. प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की है. सिक्किम विधानसभा में भी हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों को श्रद्धांजलि दी गई और सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखा.
प्रारंभिक जांच के अनुसार, हादसा सुरंग के तीसरे प्रवेश द्वार के पास हुआ. यह स्थान सुरंग के मुख्य मुहाने से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर बताया जा रहा है. यह सुरंग 500 मेगावाट की तीस्ता चरण-VI जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है. एनएचपीसी के अनुसार, चट्टानों के अंदर फंसी मीथेन गैस अचानक बाहर निकलने के बाद विस्फोट हुआ हो सकता है. कंपनी ने बताया कि विस्फोट के कारण सुरंग के अंदर घना धुआं और जहरीली गैसें फैल गईं.
एक अधिकारी के मुताबिक, सुरंग की खुदाई के दौरान मशीन संभवत: चट्टान के अंदर मौजूद गैस से भरे किसी छेद तक पहुंच गई. मशीन के उस हिस्से से टकराने के बाद गैस बाहर निकली और विस्फोट हो गया. हालांकि, हादसे की अंतिम वजह की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
बचाव अभियान में पश्चिम बंगाल की ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खनन सुरक्षा टीम भी शामिल हो गई है. टीम अपने साथ विशेष सुरक्षा उपकरण और आधुनिक मशीनें लेकर घटनास्थल पर पहुंची है. बचाव दल के सदस्यों ने दावा किया कि उन्होंने सुरंग के अंदर आठ और शव देखे हैं. उनका कहना है कि सुरंग का एक बड़ा हिस्सा कीचड़ से भर गया है, जिसके कारण शवों तक पहुंचना और उन्हें बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो रहा है.
इसके अलावा, बचाव अभियान के दौरान कुछ कर्मियों की तबीयत भी खराब हुई. बाद में सुरंग के अंदर कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की मौजूदगी का पता चला. जहरीली गैस के कारण बचाव कार्य को कुछ समय के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. अधिकारियों के अनुसार, सुरंग में कार्बन मोनोऑक्साइड की मौजूदगी मीथेन गैस के संभावित विस्फोट की ओर संकेत करती है. पीड़ितों के शरीर पर मिले जलने के निशान और जहरीली गैस की मौजूदगी को भी इसी आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है. First Updated : Wednesday, 22 July 2026