धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक ने जेन Z को दिया क्रेडिट, कहा 'शांति और दृढ़ता की जीत'
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि ये परिणाम सड़कों पर बैठे युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन की वजह से आया है।

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि ये परिणाम सड़कों पर बैठे युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन की वजह से आया है।
वांगचुक ने बताया "प्रत्यक्ष लोकतंत्र की जीत"
शनिवार को प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि ये फैसला छात्रों के भविष्य को बचाने और जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन का "राष्ट्र-विरोधी ताकतों" द्वारा फायदा उठाए जाने से रोकने के लिए लिया गया है।
इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल बन गया। यहीं पर वांगचुक CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे।
IT'S A VICTORY OF DEMOCRACY
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 25, 2026
direct democracy... straight from the streets.
It's a victory of peace, patience & persévérance.
Congratulations CJP, Gen Z of the nation and thank you all citizens for shedding fear and the fear of fear and rising up from every corner of the nation.… pic.twitter.com/rSLOfvba2R
वांगचुक ने X पर लिखा, "यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। CJP और देश की जेन Z को बधाई। साथ ही उन सभी नागरिकों का धन्यवाद जो डर और डर के डर को छोड़कर जवाबदेही मांगने आगे आए।"
उन्होंने आगे कहा, "अब जवाबदेही से सुधार की ओर बढ़ना चाहिए।" इसका इशारा था कि अब शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है। वांगचुक ने इसे "सीधे सड़कों से निकली प्रत्यक्ष लोकतंत्र की जीत" करार दिया और आंदोलन के शांतिपूर्ण तरीके की तारीफ की।
केंद्र और CJP की बातचीत से पहले आया इस्तीफा
प्रधान का इस्तीफा केंद्र और CJP के बीच होने वाली बातचीत के तीसरे दौर से कुछ घंटे पहले आया। CJP ने पहले ही साफ कर दिया था कि प्रधान का इस्तीफा उनकी "गैर-परक्राम्य" मांग है। सूत्रों के मुताबिक प्रधान को बर्खास्त नहीं किया गया।
उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए खुद इस्तीफा दिया। सरकार भी उन्हें सम्मानजनक विदाई देना चाहती थी। ओडिशा के रहने वाले BJP नेता धर्मेंद्र प्रधान 2021 से शिक्षा मंत्री थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP की वापसी के बाद उन्हें दोबारा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी।
अब सुधार पर होगा आंदोलन का फोकस
पिछले कुछ दिनों से जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं का बड़ा जमावड़ा था। CJP के नेतृत्व में चल रहे इस प्रदर्शन की मांग शिक्षा नीति में पारदर्शिता और जवाबदेही थी। वांगचुक ने आंदोलन में शामिल जेन Z पीढ़ी की दृढ़ता को सलाम किया। उन्होंने कहा कि देश भर से लोग डर छोड़कर आगे आए और अपनी बात रखी।
अब वांगचुक और CJP का कहना है कि इस्तीफा मंजिल नहीं है। अगला कदम शिक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार होना चाहिए ताकि छात्रों के हित सुरक्षित रहें। फिलहाल सरकार ने अभी नए शिक्षा मंत्री के नाम का ऐलान नहीं किया है। लेकिन वांगचुक का बयान साफ है - आंदोलन अब जवाबदेही से आगे जाकर बदलाव की मांग करेगा।


