मोहन सिंह ओबेरॉय, जिनका नाम आज हर किसी की जुबां पर है, एक ऐसे व्यक्ति का उदाहरण हैं, जिन्होंने अपार संघर्षों के बावजूद सफलता के शिखर को छुआ. ओबेरॉय ग्रुप का नाम आज पूरी दुनिया में लग्जरी और भव्यता का पर्याय बन चुका है, लेकिन एक वक्त था जब मोहन सिंह ओबेरॉय की ज़िंदगी सख्त संघर्षों से भरी हुई थी.
मोहन सिंह ओबेरॉय पाकिस्तान के अमृतसर से थे और विभाजन के समय उन्हें अपने परिवार के साथ भारत आना पड़ा. भारत में आकर उन्होंने नई शुरुआत की और कई कठिनाइयों का सामना किया. शुरुआत में उनके पास कोई खास पूंजी नहीं थी, और उन्होंने 50 रुपये की सैलरी पर काम करना शुरू किया. यही नहीं, अपने परिवार को पालने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी के गहने तक गिरवी रखे थे.
हालांकि, मोहन सिंह ओबेरॉय की मेहनत और दृष्टिकोण ने उन्हें सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उन्होंने होटल व्यवसाय में कदम रखा और अपने पहले होटल की नींव रखी. धीरे-धीरे उनका होटल व्यवसाय बढ़ता गया और ओबेरॉय ग्रुप ने लग्जरी होटलों के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई. उनका यह साम्राज्य आज 250,000,000,000 रुपये से भी अधिक मूल्य का हो चुका है, और यह ओबेरॉय होटल्स के नाम से दुनिया भर में जाना जाता है.
मोहन सिंह ओबेरॉय का सफर वास्तव में प्रेरणादायक है. उन्होंने अपनी मेहनत, दूरदर्शिता और साहस के बल पर एक छोटे से होटल व्यवसाय से शुरुआत की थी, जो अब एक विशाल और प्रतिष्ठित साम्राज्य बन चुका है. उनका जीवन यह साबित करता है कि यदि मेहनत और दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी व्यक्ति अपनी मेहनत से बड़े से बड़े सपने को हकीकत बना सकता है. First Updated : Thursday, 27 March 2025