अपने ही बड़े फैसले से क्यों नाराज हुआ सुप्रीम कोर्ट, मानी गलती

जमानत अधिकार है, जेल अपवाद। यह मानना है सुप्रीम कोर्ट का। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा साजिश मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को जमानत देने से इनकार करने वाले अपने ही फैसले पर आपत्ति जताई है।

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Edited By: JBT Desk

फैसला जब न्यायसंगत नहीं होता है तो सुप्रीम कोर्ट अपने ही फैसले को पलटने और या उस पर एतराज जताने से कतराता नहीं है और शायद यही वजह है कि लोकतंत्र का स्तंभ माने जाने वाले न्यायपालिक पर लोगों का अटूट विश्वास  है। न्याय में देरी हो सकती है लेकिन अन्याय नहीं हो सकता है इसकी बानगी कई बार देखने को मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा साजिश मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को जमानत नहीं देने के पिछले फैसले को गलत माना है। कोर्ट ने यह बयान सैयद इफ्तिखार अंद्राबी से जु़ड़े नार्को टेररिज्म मामले पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने माना कि किसी आरोपी को बेला देना एक नियम है उसे जेल भेजना अपवाद होना चाहिए 

मौलिक अधिकार का उल्लंघन गलत

जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने केए नजीब मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया। बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में माना था कि मौलिक अधिकार का उल्लंघन होने पर अदालतें गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) मामलों में जमानत दे सकती हैं। कोर्ट ने कहा खालिद की जमानत याचिका खारिज करते समय कोर्ट ने इस फैसले पर ध्यान नहीं दिया था। 2019 से 2023 के बीच पूरे भारत में UAPA मामलों में सिर्फ 1.5%-4% लोगों को सजा हुई। यानी लगभग 94% मामलों में बरी होने की संभावना होती है।

छोटी बेंच को बड़ी बेंच के फैसले मानने पड़ेंगे

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जब कोई बड़ी बेंच फैसला सुना देती है तो छोटी बेंच को उसे मानना ही पड़ेगा। आजकल ऐसा देखा जा रहा है कि छोटी बेंच सीधे-सीधे मना तो नहीं करतीं, लेकिन घुमा-फिराकर बड़े फैसले के असर को कमजोर कर देती हैं।

एक साल तक अपील करने पर रोक लगाई थी

इस साल 4 जनवरी को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने फैसले को रीव्यू करने से भी मना कर दिया था। कहा था कि दोनों आरोपी एक साल तक दिल्ली दंगे मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते।  दरअसल, उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद दिल्ली दंगों के आरोप में 5 साल 3 महीने से तिहाड़ में हैं। इन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उन्हें UAPA के तहत जमानत देने से इनकार किया गया था।

खालिद ने अब तक 6 बार जमानत याचिकाएं लगाईं

उमर जमानत के लिए निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक 6 बार याचिका लगा चुका है। दिल्ली में फरवरी, 2020 में हिंसा भड़की थी। इसमें 53 लोगों की मौत हुई थी। 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। 750 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं।

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