पाकिस्तान ने चीन को ऑफर किया मिलिट्री बेस, बदले में भारत के खिलाफ बड़ी साजिश: अमरीकी रिपोर्ट में हुआ खुलासा

गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान सालों तक ग्वादर को सैन्य अड्डा बनाने से इनकार करता रहा था। एक वक्त ऐसा भी था जब चीन खुद ग्वादर को मिलिट्री बेस में बदलना चाहता था, लेकिन पाकिस्तान लगातार टालता रहा।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: पाकिस्तान और चीन के रिश्तों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। Drop Site न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान चीन को ग्वादर पोर्ट पर सैन्य अड्डा देने के लिए तैयार हो गया था। इसके बदले में इस्लामाबाद ने बीजिंग के सामने तीन बड़ी शर्तें रखी थीं।

इनमें से दो शर्तें सीधे भारत के खिलाफ सैन्य ताकत बढ़ाने से जुड़ी थीं। पाकिस्तान ने चीन से एक खास हथियार की भी मांग की थी। लेकिन चीन ने पाकिस्तान की इन मांगों को ठुकरा दिया। इसके बाद दोनों देशों की बातचीत कड़वाहट के साथ खत्म हो गई।

पहले क्यों मना कर रहा था पाकिस्तान   

यहाँ दरअसल गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान सालों तक ग्वादर को सैन्य अड्डा बनाने से इनकार करता रहा था। एक वक्त ऐसा भी था जब चीन खुद ग्वादर को मिलिट्री बेस में बदलना चाहता था, लेकिन पाकिस्तान लगातार टालता रहा।

पाकिस्तान को डर था कि ऐसा करने पर अमेरिका और पश्चिमी देश नाराज हो जाएंगे। अंतर्राष्ट्रीय दबाव भी बढ़ सकता था। इसी वजह से करीब एक दशक तक पाकिस्तान ने चीन की मांग को नजरअंदाज किया और ग्वादर को सिर्फ व्यापारिक प्रोजेक्ट तक सीमित रखा।

फिर क्यों राजी हुआ पाकिस्तान   

इसके बाद हालात धीरे धीरे बदल गए। CPEC के कई बड़े प्रोजेक्ट रुक गए और चीन की फंडिंग भी धीमी पड़ गई। पाकिस्तान पर चीनी कंपनियों का बकाया बढ़ता चला गया। दूसरी तरफ पाकिस्तान में चीनी नागरिकों पर हमले भी होने लगे। 2024 में चीन के राजदूत ने खुलकर पाकिस्तान सरकार पर नागरिकों की सुरक्षा में नाकाम रहने का आरोप लगाया।

पाकिस्तान की आर्थिक हालत भी लगातार खराब होती गई। विदेशी निवेश घटा, कर्ज बढ़ा और IMF पर निर्भरता बढ़ गई। ऐसे में इस्लामाबाद के पास चीन को मनाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने निजी तौर पर चीन को भरोसा दिया कि वह ग्वादर के डीप सी पोर्ट को स्थायी चीनी सैन्य ठिकाने में बदलने की इजाजत दे सकता है। यह चीन की पुरानी रणनीतिक इच्छा थी।

पाकिस्तान की 3 बड़ी शर्तें क्या थीं? 

अमेरिका से सुरक्षा गारंटी: पाकिस्तान चाहता था कि ग्वादर में चीनी मिलिट्री बेस बनने पर चीन उसे अमेरिका की किसी भी तरह की राजनीतिक, आर्थिक या कूटनीतिक सजा से पूरी तरह बचाए।

भारत के खिलाफ ‘सैन्य वरिष्ठता’ (Superiority): पाकिस्तान ने चीन से मांग की कि वह उसकी सेना और खुफिया क्षमताओं को इतना मजबूत करे कि पाकिस्तान भारत के मुकाबले सैन्य रूप से बराबरी या बढ़त हासिल कर सके।

समुद्री परमाणु Second Strike क्षमता: सबसे संवेदनशील और गंभीर मांग यह थी कि चीन पाकिस्तान को समुद्र-आधारित परमाणु जवाबी हमले (Second Strike) की क्षमता प्रदान करे। यानी अगर भारत पहले परमाणु हमला करे तो भी पाकिस्तान समुद्र से जवाबी परमाणु हमला कर सके। यह मांग स्पष्ट रूप से भारत को टारगेट करके की गई थी।

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