रांची के अस्पतालों में खून की कमी, नहीं मिल पा रहा सिमित मात्रा में ब्लड, डॉक्टरों की बढ़ी परेशानी

रांची में रिम्स के ब्लड बैंक में खून कमी की खबर सामने आई है, जिस कारण कैंसर, हीमोफिलिया और दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के इलाज की चिंता बढ़ गई है.

Yashika Jandwani

रांची: रांची में रिम्स के ब्लड बैंक में खून कमी की खबर सामने आई है, जिस कारण कैंसर, हीमोफिलिया और दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के इलाज की चिंता बढ़ गई है. जानकारी के अनुसार, ब्लड बैंक में ब्लड का स्टॉक शून्य लेवल पर पहुंच चुका है. इसी को देखते हुए अस्पतालों द्वारा सोशल मीडिया और व्हाट्सप्प ग्रुप के जरिए ब्लड ढूंढ़ना पड़ रहा है. वहीं कई मामले ऐसे भी सामने आया है, जिसमें रिप्लेसमेंट डोनर मिलने के बाद ही मरीजों तक रक्त पहुंचाया गया है. 

इलाज में हो रही परेशानी 

अस्पताल से सामने आई जानकारी के अनुसार, ओ-नेगेटिव, ए-नेगेटिव और बी-नेगेटिव का स्टॉक एक कदम खत्म हो चुका है, जिस कारण मेडिकल इमरजेंसी में मरीजों को कई घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. वहीं हाल ही में रांची के एक अस्पताल में ओ-पॉजिटिव और एसडीपी (सिंगल डोनर प्लेटलेट्स) की तत्काल जरूरत पड़ी थी, जिसका पोस्ट भी सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था.

डॉक्टरों का कहना है कि करीब 8 घंटे बाद ब्लड प्रोसेस होकर मरीजों तक पहुंच रहा है. बता दें, रिम्स और सदर अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सिमित मात्रा में उपलब्ध होने के कारण डॉक्टरों को इलाज में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. 

संक्रमित रक्त का आरोप 

सिमित मात्रा में खून न होने से इसका सबसे ज्यादा असर हीमोफिलिया और थैलेसीमिया के मरीजों पर पड़ रहा हैं. वहीं झारखंड में, हजारों बच्चे और मरीज नियमित रक्त आधान पर निर्भर रहते हैं और अकेले रांची जिले में ही, बड़ी संख्या में मरीज RIMS और सदर अस्पताल में इलाज करवाते हैं. साथ ही हाल के वर्षों में, ब्लड बैंकों की सुरक्षा और गुणवत्ता भी जांच के दायरे में आ गई है. चाईबासा सदर अस्पताल में संक्रमित रक्त चढ़ाने का एक मामला सामने आने के बाद, पूरे राज्य में ब्लड बैंकों की निगरानी और निरीक्षण तेज कर दिया गया है.

डोनर नेटवर्क का कमजोर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट ब्लड डोनेशन कैंप में कमी, नियमित डोनर नेटवर्क के कमजोर होने और गर्मियों के मौसम में ब्लड डोनेशन में गिरावट के कारण और भी बढ़ गया है. कई स्वयंसेवी संगठनों का कहना है कि लोग आमतौर पर तभी ब्लड डोनेट करने के लिए आगे आते हैं, जब कोई बहुत जरूरी जरूरत होती है, जबकि ब्लड बैंकों को ब्लड की लगातार सप्लाई की जरूरत होती है. बता दें, डॉक्टरों और सामाजिक संगठनों ने लोगों से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की है. एक यूनिट रक्त कई मरीजों की जान बचा सकता है.

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