नई दिल्ली : भारतीय वायुसेना की सामरिक शक्ति के प्रमुख स्तंभ स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है. इसी महीने एक महत्वपूर्ण एयर बेस पर लैंडिंग के दौरान एक और तेजस विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हालांकि इस हादसे में पायलट की जान बच गई. लेकिन विमान को पहुँची अपूरणीय क्षति ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वायुसेना ने अब पूरे तेजस बेड़े के सघन तकनीकी निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य की दुर्घटनाओं को टाला जा सके.
सूत्रों से प्राप्त विशेष जानकारी के अनुसार. यह दुर्घटना लैंडिंग के नाजुक चरण के दौरान हुई. जिसमें विमान को इतनी गंभीर क्षति पहुँची है कि इसे अब शायद ही दोबारा इस्तेमाल किया जा सके. विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि विमान को पूरी तरह सेवा से बाहर करना अब मजबूरी हो सकता है. वायुसेना ने इस घटना के तकनीकी पहलुओं को गहराई से समझने के लिए उच्चस्तरीय जांच दल गठित किया है. यह पता लगाया जा रहा है कि क्या लैंडिंग सिस्टम में कोई बड़ी तकनीकी खराबी थी.
इस पूरे हादसे के बीच सबसे संतोषजनक पहलू यह रहा कि विमान उड़ा रहे जांबाज पायलट को कोई गंभीर चोट नहीं आई है. आपातकालीन स्थिति में भी पायलट ने अपने पेशेवर कौशल का जबरदस्त परिचय दिया. जिससे एक बड़ा मानवीय संकट समय रहते टल गया. विमान की भारी क्षति के बावजूद पायलट की सलामती को वायुसेना ने बड़ी राहत माना है. फिलहाल पायलट की स्थिति पर डॉक्टरों की कड़ी नजर है. लेकिन इस हादसे ने विमान के सुरक्षा गियर की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल उठा दिए हैं.
दुर्घटनाग्रस्त विमान उन 32 एकल-सीट वाले तेजस विमानों के शुरुआती बैच का हिस्सा था. जिन्हें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने वायुसेना को डिलीवर किया है. गौरतलब है कि तेजस के नए और उन्नत संस्करण Mk1A की आपूर्ति पहले से ही कई तय समयसीमाओं को पार कर चुकी है. जिससे वायुसेना की क्षमता बढ़ाने की योजना पर असर पड़ रहा है. भारतीय वायुसेना ने कुल 180 Mk1A विमानों का विशाल ऑर्डर दिया हुआ है. अब इस ताजा हादसे के बाद सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण पर जबरदस्त दबाव बढ़ गया है.
तेजस विमानों से जुड़ी यह तीसरी बड़ी दुर्घटना है. जिसने रक्षा गलियारों में गंभीर चिंता बढ़ा दी है. इससे पहले मार्च 2024 में जैसलमेर के पास एक विमान तब दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. जब वह एक अभ्यास सत्र से वापस लौट रहा था. उस समय पायलट ने सूझबूझ से इजेक्ट कर अपनी जान बचाई थी. हालांकि. नवंबर 2025 में दुबई एयरशो के दौरान हुआ हादसा काफी दुखद और विचलित करने वाला था. जहां प्रदर्शन के समय विमान क्रैश होने से पायलट की मृत्यु हो गई थी. जिसकी जांच अभी जारी है.
वर्तमान हादसे के बाद वायुसेना ने पूरे तेजस बेड़े के सघन सुरक्षा ऑडिट और तकनीकी निरीक्षण का सख्त आदेश दिया है. विशेषज्ञों का एक दल अब इंजन से लेकर फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम की बारीकी से जांच करेगा. इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कहीं यह कोई तकनीकी दोष तो नहीं है. 180 नए उन्नत विमानों की खेप आने से पहले मौजूदा बेड़े की सुरक्षा खामियों को दूर करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है. ताकि भविष्य में ऐसी महंगी और खतरनाक दुर्घटनाओं को पूरी तरह टाला जा सके. First Updated : Sunday, 22 February 2026