नई दिल्लीः विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेयर लेयन ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) लगभग तैयार है. उन्होंने इसे सभी व्यापारिक सौदों की माता (Mother of All Trade Deals) कहा, क्योंकि इस समझौते का आकार और वैश्विक आर्थिक प्रभाव अत्यंत बड़ा होगा.
वॉन डेयर लेयन ने कहा कि कुछ काम अभी भी बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की कगार पर हैं. इसे कुछ लोग सभी सौदों की माता कहते हैं. यह एक ऐसा बाजार बनाएगा जिसमें 2 अरब लोग शामिल होंगे और जो वैश्विक जीडीपी का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा.
भारत और ईयू के बीच इस समझौते पर बातचीत की शुरुआत 2007 में हुई थी, लेकिन लगभग दस साल तक यह रुकी रही. 2022 में दोनों पक्षों के राजनीतिक समर्थन के साथ फिर से वार्ता शुरू हुई. इसके बाद प्रगति की गति तेज हो गई, खासकर भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (India-EU Trade and Technology Council) के नियमित सत्रों के चलते.
यह समझौता दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत को यूरोपीय संघ, जो विश्व के सबसे बड़े व्यापारिक समूहों में से एक है, से जोड़ देगा. ऐसे समय में जब देश अपने व्यापारिक जोखिम को कम करने और किसी एक साझेदार पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं, यह समझौता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और व्यापार मार्गों को नया आकार दे सकता है.
यूरोपीय संघ के लिए भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार बनता जा रहा है क्योंकि यह चीन पर अपनी निर्भरता कम करने और भरोसेमंद अर्थव्यवस्थाओं के साथ अधिक निकटता से काम करने की दिशा में प्रयासरत है. भारत के लिए, 27 ईयू देशों तक बेहतर पहुंच, जो उसका दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार हैं, निर्यात बढ़ाने, रोजगार सृजित करने और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने में मदद करेगी.
सूत्रों के अनुसार, उर्सुला वॉन डेयर लेयन अगले सप्ताह की शुरुआत में भारत का दौरा करने वाली हैं. राजनयिकों का कहना है कि यह यात्रा राजनीतिक स्तर पर सबसे कठिन मुद्दों को सुलझाने में निर्णायक साबित हो सकती है. इस दौरे का समय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस महीने के अंत में भारत-ईयू नेताओं की बैठक भी प्रस्तावित है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह समझौता सफल होता है, तो यह केवल दोनों पक्षों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और निवेश पर भी गहरा असर डालेगा. इससे न केवल भारत और यूरोप के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक आर्थिक संरचना में भी महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं.
इस समझौते के लागू होने से भारत के निर्यातक और व्यवसायिक समुदाय नई संभावनाओं की ओर अग्रसर होंगे. वहीं, यूरोपीय कंपनियों को भारतीय बाजार में प्रवेश करने और स्थानीय उद्योगों के साथ साझेदारी करने के अवसर मिलेंगे. First Updated : Tuesday, 20 January 2026