पॉक्सो केस में फंसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर लगी रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को अग्रिम जमानत मिल गई है. इनपर नाबालिगों के साथ यौन शोषण का आरोप लगा था.

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिगों के कथित यौन शोषण के मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को अग्रिम जमानत दे दी है. कोर्ट के इस फैसले से दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लग गई है. न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई की और दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए यह राहत प्रदान की.
याचिका पर सुनवाई और गिरफ्तारी पर रोक
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और स्वामी मुकुंदानंद गिरी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी. कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था.
इससे पहले भी कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी और किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से बचने के निर्देश दिए थे. अब अग्रिम जमानत मिलने से दोनों को तत्काल गिरफ्तारी का खतरा टल गया है.
राज्य सरकार का विरोध
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने अग्रिम जमानत का विरोध किया. उन्होंने पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामले की गंभीरता बताई और कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले निचली अदालत में जाना चाहिए था.
दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि पूरा मामला साजिश के तहत रचा गया है. आरोपों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और ये पूरी तरह निराधार है. उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी. स्वामी पक्ष ने मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया है.
अविमुक्तेश्वरानंद का पूरा मामला?
यह मामला आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर दर्ज किया गया था. प्रयागराज के झूंसी थाने में जिला अदालत के आदेश के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई. इसमें नाबालिग बच्चों से दुष्कर्म के आरोप लगाए गए हैं. मामला पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ भादवी (बीएनएस) की धाराओं के तहत दर्ज है.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोपों से इनकार किया है और जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही है. उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ने पर नार्को टेस्ट कराने को भी तैयार हैं. कोर्ट ने दोनों को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं. इस फैसले से धार्मिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है. जांच आगे बढ़ रही है और अंतिम सत्य जांच एजेंसियों के हाथ में है.


