उत्तर प्रदेश: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे में करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले ने देश की राजनीति और धार्मिक गलियारों में भूचाल ला दिया है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक तरफ जहां एसआईटी की जांच के बाद 8 मुख्य आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है, वहीं दूसरी तरफ नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है.
इन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज
इस एफआईआर में अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और सुभाष श्रीवास्तव को नामजद किया गया है. इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 306, 316, 317 और 61 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है. चौंकाने वाली बात यह है कि प्राथमिकी में शामिल अधिकांश लोग ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों के ही करीबी रिश्तेदार हैं और नोटों की गिनती के काम में शामिल थे.
चढ़ावा चोरी मामले की पूरी टाइमलाइन
सियासी आरोप और चंपत राय की सफाई
7 जून
समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के दानपात्र से 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये चोरी होने का सनसनीखेज आरोप लगाया. शाम को ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने स्पष्टीकरण जारी कर आरोपों को खारिज करने की कोशिश की.
नृपेंद्र मिश्र का अयोध्या दौरा
8 जून
चंपत राय ने सार्वजनिक रूप से आरोपों को पूरी तरह नकार दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र देर शाम अचानक अयोध्या पहुंचे और स्थिति का जायजा लेकर अगले दिन लौटे.
सीबीआई जांच की मांग
9 जून
भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा और इस संवेदनशील मामले की जांच सीबीआई या ईडी जैसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की.
पीएमओ का एक्शन
10 जून
प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए यूपी सरकार और ट्रस्ट से रिपोर्ट तलब की. इसी दिन नृपेंद्र मिश्र दोबारा तत्काल अयोध्या पहुंचे और अधिकारियों के साथ चार घंटे लंबी आपातकालीन बैठक की.
पुराना वीडियो और बड़ा दावा
11 जून
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व अकाउंटेंट महिपाल सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ. उन्होंने दावा किया कि 2021-2022 में ही उन्होंने इस चोरी को पकड़ा था, लेकिन तब इसके सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए गए थे.
एसआईटी का गठन
13 जून
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आधिकारिक आग्रह पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक विशेष जांच दल का गठन किया गया.
मैराथन पूछताछ की शुरुआत
15 जून
एसआईटी ने अयोध्या में डेरा डाला. टीम ने तत्कालीन महासचिव चंपत राय और आमंत्रित सदस्य गोपाल राय से शुरुआती जानकारी ली. इसके साथ ही चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े 8 से 10 कर्मचारियों से 6 घंटे तक कड़ी पूछताछ की गई.
11 महीने के दस्तावेजों की जांच
16 जून
एसआईटी ने चंपत राय और गोपाल राय से 4-4 घंटे तक गहन सवाल-जवाब किए. टीम ने ट्रस्ट के पिछले 11 महीनों के वित्तीय दस्तावेज, लेजर बुक और सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में ले लिए.
बैंक और निजी एजेंसियों पर शिकंजा
17 जून
जांच टीम ने स्टेट बैंक के अधिकारियों और नोटों की गिनती करने वाली निजी सुरक्षा व प्रबंधन एजेंसी के प्रतिनिधियों को तलब किया. बैंक स्टेटमेंट्स और ऑडिट रिकॉर्ड्स को क्रॉस-चेक किया गया.
मंदिर परिसर में 10 घंटे
18 जून
एसआईटी की टीम पूरे 10 घंटे मंदिर परिसर में मौजूद रही. ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा से 4 घंटे और संदिग्ध टिटू यादव से डेढ़ घंटे तक पूछताछ हुई. दोनों के बयानों का मिलान किया गया.
कैशियर से पूछताछ और सबूत जुटान
19 - 20 जून
चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राय से अलग-अलग कमरों में आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई. एसबीआई के शाखा प्रबंधक और मुख्य कैशियर के बयान दर्ज किए गए. 20 जून को सभी संदिग्धों के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर एसआईटी सारे सबूतों के साथ लखनऊ रवाना हो गई.
गृह विभाग को रिपोर्ट
23 जून
एसआईटी ने अपनी 20 पन्नों की शुरुआती और बेहद गोपनीय रिपोर्ट गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को सौंप दी. जिसमें संगठित चोरी की पुष्टि की गई.
FIR और चंपत राय का इस्तीफा
25 - 26 जून
25 जून को रामजन्मभूमि कोतवाली में अनुकल्प मिश्र समेत 8 नामजद और कई अज्ञात लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई. इसके तुरंत बाद, 26 जून को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया. First Updated : Friday, 26 June 2026