तेलंगाना में मेंढकों की पूजा का वीडियो वायरल, वजह जानकर आपके भी उड़ जाएंगे होश
तेलंगाना के जनगांव जिले के एक गांव से आस्था की एक बेहद अनोखी तस्वीर सामने आई है. यहां लंबे समय से बारिश न होने से परेशान किसानों ने इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए मेंढकों की विशेष पूजा-अर्चना की और पूरे गांव में उनकी भव्य शोभायात्रा निकाली.

तेलंगाना: आसमान में बादलों की बेरुखी और खेतों में पसरे सूखे ने अन्नदाता को एक बार फिर सदियों पुरानी परंपराओं की शरण में जाने पर मजबूर कर दिया है. तेलंगाना के जनगांव जिले के एक गांव से आस्था की एक बेहद अनोखी तस्वीर सामने आई है. यहां लंबे समय से बारिश न होने से परेशान किसानों ने इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए मेंढकों की विशेष पूजा-अर्चना की और पूरे गांव में उनकी भव्य शोभायात्रा निकाली.
सदियों पुरानी परंपरा 'कप्पाथल्ली आटा' का आयोजन
ग्रामीणों ने इस संकट की घड़ी में अपनी पारंपरिक और सदियों पुरानी रस्म 'कप्पाथल्ली आटा' का सहारा लिया. इस अनोखे आयोजन के तहत गांव के लोगों ने सबसे पहले मेंढकों को पकड़ा. इसके बाद महिलाओं ने उन्हें हल्दी लगाई, फूलों की मालाओं से सजाया और एक सजे-धजे थाल में रखकर पूरे गांव में जुलूस निकाला. सरपंच रामकृष्ण के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा में गांव के युवा, बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुए. महिलाएं और युवतियां पारंपरिक लोकगीत गाते हुए घर-घर पहुंचीं और प्रकृति व बारिश के देवता से जल्द से जल्द राहत बरसाने की गुहार लगाई.
बेबस हुए किसान
खेती का मुख्य सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन बादलों के न बरसने से किसान बेहद बेबस और चिंतित हैं. ग्रामीणों और सरपंच का कहना है कि पर्याप्त पानी न होने के कारण कपास और धान जैसी मुख्य फसलों की बुवाई का काम पूरी तरह अटक गया है. खासकर छोटे और सीमांत किसानों की हालत बदतर है, जिनके पास सिंचाई के आधुनिक साधन नहीं हैं. उनके कई खेत अब तक जोते भी नहीं जा सके हैं. किसानों को डर सता रहा है कि अगर अगले कुछ दिनों में पानी नहीं बरसा, तो उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा और भारी आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा.
कमजोर मॉनसून ने बढ़ाई टेंशन
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार एल नीनो के प्रभाव के चलते दक्षिण-पश्चिम मॉनसून काफी कमजोर और सुस्त पड़ गया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की रिपोर्ट भी बताती है कि जून के महीने में सामान्य से बहुत कम और असमान बारिश दर्ज की गई है. इस वजह से जमीन में पर्याप्त नमी नहीं है। जिन किसानों के पास थोड़ी बहुत व्यवस्था है, वे महंगे भूजल के सहारे जैसे-तैसे काम चला रहे हैं, लेकिन बाकी किसान सिर्फ आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं. नेल्लुटला गांव के लोगों का कहना है कि यह आयोजन सिर्फ एक अंधविश्वास या रस्म नहीं है, बल्कि यह धरतीपुत्रों के पेट पालने की चिंता और उनकी आखिरी उम्मीद का प्रतीक है.


