योगी सरकार में कैबिनेट विस्तार पर बड़ी अपडेट, महिला कार्ड और ब्राह्मणों के नामों पर होगी नजर!
Yogi Adityanath की सरकार में संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर हलचल तेज है। इस बार महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने और ब्राह्मण चेहरे शामिल करने पर खास जोर रहेगा, जिससे राजनीतिक संतुलन और आगामी चुनावों के समीकरण साधे जा सकें।

नई दिल्ली: यूपी की योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर काफी समय से चर्चा है। पहले कहा गया कि खरमास खत्म होते ही बदलाव होगा। अब नई जानकारी है कि बंगाल चुनाव के निपटने के बाद कभी भी यह फेरबदल हो सकता है। इस बार कुछ नए चेहरों की एंट्री तय मानी जा रही है, जबकि कुछ मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है। साथ ही कई विभागों की अदला-बदली भी संभव है।
2027 की तैयारी जुटी भाजपा
आपको बताते चलें कि भाजपा फिलहाल 2027 विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को मजबूत करने में जुटी है। इसलिए कुछ वरिष्ठ और तेज-तर्रार नेताओं को संगठन की कमान दी जा सकती है। मंत्री परिषद में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधना पार्टी की प्राथमिकता रहेगी। पश्चिम यूपी से अब तक न सीएम, न प्रदेश अध्यक्ष और न ही कोई डिप्टी सीएम है। ऐसे में इस इलाके को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश होगी।
पिछले कुछ दिनों में लखनऊ से दिल्ली तक लगातार मंथन चला है। विनोद तावड़े लखनऊ आए थे और कई नेताओं से मिले। यूपी के दोनों डिप्टी सीएम भी दिल्ली जाकर शीर्ष नेतृत्व से मिल चुके हैं। संघ की तरफ से समन्वय देख रहे अरुण कुमार, पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ नामों पर चर्चा चल रही है। पहले राउंड में कुछ नाम शॉर्टलिस्ट हो चुके हैं, बस दिल्ली की हरी झंडी का इंतजार है।
क्या ब्राह्मण चेहरे को भी मिलेगा मौका?
प्राप्त जानकारियों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय होने के बाद अब पंकज चौधरी को जिम्मेदारी मिल चुकी है। इसके बाद कैबिनेट विस्तार की तैयारी तेज हो गई है। चर्चा है कि किसी वरिष्ठ ब्राह्मण नेता को तवज्जो मिल सकती है। फिलहाल उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ही बड़े ब्राह्मण चेहरे हैं। जितिन प्रसाद अब दिल्ली की राजनीति में हैं। वहीं विपक्ष भी बीते महीनों से ब्राह्मण नाराजगी का नैरेटिव चला रहा है, इसलिए भाजपा इस समुदाय से किसी को मौका दे सकती है।
महिला नामों पर पूरा फोकस
बताया जा रहा है कि इस कैबिनेट विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा महिला मंत्री को लेकर है। महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरने के बाद भाजपा इसे मुद्दा बना रही है। किसी महिला को कैबिनेट में जगह देकर पार्टी विपक्ष को घेरने का मौका नहीं छोड़ेगी। जिसका सीधा लाभ पार्टी को आगामी 2027 के चुनावों में मिल सकता है।
दलित और OBS चेहरों पर होगी नजर!
गौरतलब है कि अखिलेश यादव लगातार PDA का नारा दे रहे हैं और कांशीराम जयंती से लेकर आंबेडकर जयंती तक मना रहे हैं। ऐसे में भाजपा दलित समुदाय से भी किसी नेता को मंत्री बना सकती है। वहीं इसके साथ ही ओबीसी चेहरों में भूपेंद्र चौधरी का नाम तय माना जा रहा है। वह अभी तक प्रदेश अध्यक्ष थे और जाट बिरादरी से आते हैं। साफ छवि और विवादों से दूर रहने वाले नेता हैं। पश्चिम यूपी को साधने के लिए उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।


