अयोध्या: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शुक्रवार को अयोध्या के राम मंदिर में दान पात्रों से हुई चोरी पर गहरी चिंता जताई। संघ ने इस घटना को "बेहद दुखद" बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। साथ ही मंदिर प्रबंधन में ज्यादा पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की अपील की।
नई दिल्ली से जारी बयान में RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर पीढ़ियों के त्याग और समर्पण का नतीजा है। यह हिंदू समुदाय के लिए आस्था और भक्ति का प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने कहा, "अयोध्या में श्री राम लला मंदिर के दान पात्रों में चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरे समाज और राम भक्तों की भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है। हम सभी इससे बेहद दुखी और आक्रोशित हैं।"
होसबोले ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर विशेष जांच दल SIT का गठन किया है। SIT की सिफारिशों के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाए, उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
RSS नेता ने ट्रस्ट से आग्रह किया कि वह इस घटना को असाधारण मामला माने। मंदिर के प्रबंधन और संचालन में अगर कोई कमी है तो उसे तुरंत दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि लाखों भक्तों की आस्था बनाए रखना जरूरी है और इस घटना से फैली अनिश्चितता खत्म होनी चाहिए।
होसबोले ने भरोसा जताया कि ट्रस्ट पारदर्शी व्यवस्था से जनता का विश्वास और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा, "उचित वित्तीय प्रबंधन, त्रुटिहीन और पारदर्शी संचालन और पवित्रता से भरे माहौल के जरिए ट्रस्ट हिंदू समाज की आस्था को मजबूत करता रहेगा।"
इस बीच RSS ने हिंदू समुदाय से शांति बनाए रखने की अपील की। संगठन ने कहा कि जांच के दौरान धैर्य और संयम बरतें। बयान में कहा गया कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का फायदा उठाकर हिंदू-विरोधी और देश-विरोधी ताकतें समाज को बदनाम करने की साजिश कर सकती हैं, जिसे नाकाम करना जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 6 जुलाई की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है। राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी के आरोपों के बाद दोनों ने इस्तीफा दे दिया था।
ट्रस्ट सूत्रों ने बताया कि इस्तीफे पर फैसला लेने से पहले दोनों से लिखित और मौखिक स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। ट्रस्ट के नियमों के अनुसार किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले पक्ष रखने का मौका देना जरूरी है। इस्तीफा स्वीकार करने या पद से हटाने के लिए ट्रस्टियों का बहुमत जरूरी होगा। First Updated : Friday, 03 July 2026