लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना इलाके से एक ऐसी घटना सामने आई, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. सेक्टर एल में रहने वाले 49 वर्षीय शराब कारोबारी और पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह अचानक लापता हो गए. शुरुआत में मामला साधारण गुमशुदगी जैसा लगा, लेकिन कुछ ही दिनों में जो सच सामने आया, उसने पूरे शहर को हिला दिया. आरोप है कि उनके ही बेटे ने घर के भीतर उनकी हत्या कर दी और शव को छिपाने की कोशिश की.
20 फरवरी को मानवेंद्र के बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने थाने में पिता की गुमशुदगी दर्ज कराई. उसने बताया कि सुबह करीब छह बजे उसके पिता दिल्ली जाने की बात कहकर निकले थे और 21 फरवरी तक लौटने वाले थे. उसने यह भी कहा कि उनके तीनों मोबाइल फोन बंद हो गए थे. शुरू में पुलिस को मामला सामान्य लगा, लेकिन सीसीटीवी फुटेज ने कहानी बदल दी. कैमरों में मानवेंद्र घर के अंदर जाते तो दिखे, मगर बाहर निकलते नहीं.
दोबारा पूछताछ में बदला बयान
मोबाइल की आखिरी लोकेशन काकोरी इलाके में मिली, लेकिन वहां कुछ हाथ नहीं लगा. पुलिस ने पड़ोसियों से पूछताछ की तो पता चला कि 19 और 20 फरवरी की रात घर की तीसरी मंजिल पर कुछ हलचल हुई थी. किसी ने तेज आवाज भी सुनी थी, पर उसे घरेलू मामला समझकर नजरअंदाज कर दिया गया. अक्षत से दोबारा पूछताछ में उसके बयान बदलने लगे. कभी वह डिप्रेशन की बात करता, कभी कहता उसे कुछ पता नहीं. यहीं से पुलिस का शक गहरा गया.
घर की तलाशी में चौंकाने वाला खुलासा
जब घर की तलाशी ली गई, तो एक कमरे में रखे नीले ड्रम पर पुलिस की नजर पड़ी. कमरे में हल्की बदबू थी, जिसे सफाई के केमिकल से छिपाने की कोशिश की गई थी. ड्रम खोलने पर अंदर मानवेंद्र का शव मिला. यह दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए. इसके बाद अक्षत से सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने पिता से हुए विवाद की बात स्वीकार की.
अक्षत प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था. पुलिस के अनुसार, पढ़ाई को लेकर पिता-पुत्र के बीच तनाव था. अक्षत ने दावा किया कि बहस के दौरान पिता ने लाइसेंसी राइफल उठाई और छीना-झपटी में गोली चल गई, जिससे उनकी मौत हो गई. हालांकि, बाद की घटनाएं इस दावे पर सवाल खड़े करती हैं.
शव छिपाने की कोशिश
आरोप है कि घटना के बाद अक्षत ने शव को तीसरी मंजिल से नीचे लाकर ठिकाने लगाने की योजना बनाई. पहले उसने कार से गोमती नदी में फेंकने का विचार किया, लेकिन वजन ज्यादा होने से सफल नहीं हुआ. फिर बाजार से आरी लाकर शव के हाथ-पैर काटे और कुछ हिस्सों को अलग जगह फेंक दिया. धड़ को नीले ड्रम में रखकर बाद में हटाने की योजना बनाई गई थी.
बहन की चुप्पी ने उठाए सवाल
घटना के समय घर में अक्षत की छोटी बहन भी मौजूद थी. पुलिस का कहना है कि उसे धमकाकर चुप कराया गया. चार दिन तक वह डर के कारण कुछ नहीं बोली. परिवार और रिश्तेदार इस घटना से सदमे में हैं. मानवेंद्र के भाई ने बताया कि हाल ही में उनकी मुलाकात हुई थी और सब सामान्य लग रहा था.
फोरेंसिक टीम को घर और कार से खून के निशान मिले, जिन्हें साफ करने की कोशिश की गई थी. इससे पुलिस का शक पुख्ता हुआ. फिलहाल अक्षत को हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या केवल पढ़ाई का दबाव वजह था या परिवार में और भी कारण छिपे थे. घर में अब सन्नाटा है और पूरा इलाका इस घटना से स्तब्ध है. First Updated : Tuesday, 24 February 2026