निहंगों और पुलिस के बीच तनाव खत्म, पूरी रात चली बातचीत के बाद निकला समाधान

नगरासू और कर्णप्रयाग गुरुद्वारा विवाद को लेकर बना तनाव पूरी रात चली बातचीत के बाद खत्म हो गया. प्रशासन और निहंगों के बीच सहमति बनने से हालात सामान्य होने लगे और सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली.

Shraddha Mishra

उत्तराखंड: नगरासू और कर्णप्रयाग गुरुद्वारा विवाद को लेकर पिछले कुछ दिनों से उत्तराखंड में बना तनाव आखिरकार बातचीत के जरिए खत्म हो गया. पूरी रात चली वार्ता के बाद शुक्रवार तड़के निहंग सिखों और प्रशासन के बीच सहमति बन गई, जिसके बाद निहंग जत्था वापस लौटने को तैयार हो गया. इस फैसले से देहरादून सहित आसपास के इलाकों में हालात सामान्य होने लगे हैं और प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है. पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो.

यह पूरा मामला कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारों से जुड़े पुराने विवाद से जुड़ा है. इसी मामले में चार निहंग सिखों की गिरफ्तारी के बाद विरोध शुरू हुआ था. इससे पहले निहंग जत्थे ने 25 जून को पंजाब और हिमाचल प्रदेश से उत्तराखंड की ओर कूच करने का ऐलान किया था. उनका कहना था कि वे अपने साथियों की रिहाई और जमानत की मांग को लेकर आगे बढ़ेंगे. हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर स्थित कुल्हाल चेक पोस्ट पर बड़ी संख्या में निहंग पहुंचे, जहां प्रशासन ने उनसे बातचीत की कोशिश की. पांवटा साहिब में अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा हुई, लेकिन मार्च रोकने को लेकर सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद जत्थे का एक हिस्सा आगे बढ़ गया.

निहंगों ने रखा अपना पक्ष

निहंग सिखों ने साफ किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना नहीं है. उनका कहना था कि वे शांतिपूर्वक हेमकुंड साहिब की यात्रा करना चाहते हैं और साथ ही गिरफ्तार किए गए अपने साथियों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं. करीब 50 निहंग मोटरसाइकिलों पर देहरादून की ओर रवाना हुए, जबकि लगभग 150 निहंग वापस पांवटा साहिब लौट गए. कुछ लोग छोटे-छोटे समूहों में अलग-अलग रास्तों से आगे बढ़ते रहे.

देहरादून में बढ़ाई गई सुरक्षा

निहंगों के उत्तराखंड में प्रवेश की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया. देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र समेत सीमावर्ती इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर दी गई. इस बीच कुछ निहंग पुलिस की निगरानी से बचते हुए ऋषिकेश की ओर बढ़ गए, जिससे वहां भी सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई. देर रात करीब 12 बजे जोगीवाला चेक पोस्ट पर देहरादून-ऋषिकेश हाईवे सहित कई मार्गों पर बैरिकेड लगाए गए. इसके कारण शहर के कई हिस्सों में लंबा ट्रैफिक जाम भी देखने को मिला. जब निहंग जोगीवाला चेक पोस्ट पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी. इसके बाद जत्था अलग-अलग समूहों में बंट गया और स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया.

रातभर चली वार्ता, निकला समाधान

बाद में कुछ निहंगों को देहरादून के रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारे में ठहराया गया. गुरुद्वारे के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और पूरी रात जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारियों तथा सिख समाज के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत चलती रही. करीब सुबह 3:30 बजे दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और निहंग जत्था वापस पांवटा साहिब लौटने पर राजी हो गया. इस निर्णय के बाद पूरे क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने लगी.

प्रतिनिधियों और प्रशासन ने क्या कहा?

वार्ता में शामिल कांग्रेस नेता और सिख समाज के प्रतिनिधि अमरजीत सिंह ने कहा कि निहंगों का उद्देश्य कभी भी माहौल खराब करना नहीं था. उनका कहना था कि यह विवाद किसी समुदाय या क्षेत्र के बीच टकराव का नहीं था, बल्कि कुछ परिस्थितियों और बयानबाजी के कारण मामला बढ़ गया.

उन्होंने प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बातचीत के जरिए समाधान निकालना सबसे बेहतर रास्ता साबित हुआ. वहीं, जिला अधिकारी आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल ने भी बताया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही और प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए. अब हालात सामान्य हैं और क्षेत्र में शांति कायम है.

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