पश्चिम बंगाल में कितने प्रतिशत हुई वोटिंग? तमिलनाडु में भी टूटे पुराने सारे रिकॉर्ड!
23 अप्रैल को हुई वोटिंग में शाम 5 बजे तक 152 सीटों पर 89.93% मतदान दर्ज किया गया। यह आंकड़ा 90% के करीब पहुंच गया, जो पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

नई दिल्ली: गुरुवार (23 अप्रैल 2026) पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान पहले चरण की वोटिंग हुई। और इस बार की वोटिंग ने सभी को आश्चर्यचकित करते हुए पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इलेक्शन कमीशन के डाटा की माने तो इस राज्य में इतिहास की सबसे ज्यादा प्रतिशत वाली वोटिंग हुई है।
पश्चिम बंगाल में हुई बंपर वोटिंग
प्राप्त जानकारियों के मुताबिक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में वोटरों ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 23 अप्रैल को हुई वोटिंग में शाम 5 बजे तक 152 सीटों पर 89.93% मतदान दर्ज किया गया।
यह आंकड़ा 90% के करीब पहुंच गया, जो बंगाल के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले 2021 में 82.30%, 2016 में 83.02% और 2011 में 84.72% वोटिंग हुई थी। यानी पहली बार राज्य में मतदान 90% के पार पहुंचा है।
तमिलनाडु में भी दिखा वोटरों का तगड़ा जोश
पश्चिम बंगाल के साथ-साथ तमिलनाडु में भी जमकर वोट पड़े। वहां 234 सीटों पर 82.24% मतदान हुआ। 2021 में यह आंकड़ा 72.73%, 2016 में 74.24% और 2011 में 78.01% था। साफ है कि इस बार दोनों राज्यों में वोटरों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
ममता बनर्जी ने बताया जनता का गुस्सा
आपको बताते चलें कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इस भारी मतदान को जनता का गुस्सा बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने SIR के विरोध में घरों से निकलकर वोट किया है। ममता का इशारा चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया की तरफ था, जिसका TMC लगातार विरोध कर रही है। ममता ने कहा, “लोगों ने वोट के जरिए संदेश दिया है कि उन्हें सिर्फ राज्य नहीं, केंद्र से भी बीजेपी को हटाना है।”
सीएम ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शाह वोटिंग वाले दिन कोलकाता में बैठकर अधिकारियों को डरा-धमका रहे हैं। ममता का कहना था कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा, “आज बड़ी संख्या में वोट डालने निकले लोग बीजेपी की साजिशों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।”
क्या कहता है रिकॉर्डतोड़ मतदान
गौरतलब है कि राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि 90% के करीब वोटिंग कई मायनों में अहम है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का निकलना किसी बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है। 2011 में ममता की ऐतिहासिक जीत के वक्त भी 84.72% वोट पड़े थे। इस बार आंकड़ा उससे भी 5% ज्यादा है।
विपक्ष इसे एंटी-इनकंबेंसी बता रहा है, वहीं TMC इसे ममता बनर्जी पर भरोसे की मुहर कह रही है। पहले चरण की यह वोटिंग बाकी चरणों का मूड भी तय करेगी। अब सबकी नजर 152 सीटों के नतीजों पर है कि यह बंपर वोटिंग किसके फेवर में गई।


