नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौता हो गया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए इस प्रस्तावित समझौते की जानकारी साझा की. उन्होंने लिखा कि, "ईरान के साथ समझौता पूरा हो गया है. सभी को बधाई!" बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जानकारी दी कि गहन वार्ता के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है.
शरीफ की घोषणा के कुछ ही समय बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौते की पुष्टि की. ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है. सभी को बधाई! मैं इसके जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना किसी रोक-टोक के खोलने और साथ ही, अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंजूरी देता हूं. दुनिया भर के जहाजोंं, अपने इंजन चालू करो. तेल का प्रवाह शुरू होने दो!'
वहीं, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज के अनुसार, दोनों देशों के बीच समझौते में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि समझौते का उद्देश्य आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देना, क्षेत्रीय तनाव कम करना और आगे की वार्ताओं का रास्ता तैयार करना है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े निर्यात पर लगी पाबंदियों को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके अलावा, ईरान को अपने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संसाधनों तक दोबारा पहुंच देने की बात भी शामिल है.
बताया गया है कि बातचीत की अवधि के दौरान ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जा सकते हैं. इनमें से लगभग 12 अरब डॉलर शुरुआती चरण में उपलब्ध कराए जाने की संभावना जताई गई है.
प्रस्तावित समझौते में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए बड़े निवेश कार्यक्रम तैयार करने का उल्लेख भी किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 300 अरब डॉलर की विकास और निवेश योजनाओं पर विचार किया जा सकता है.
इस पहल का उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देना बताया जा रहा है.
समझौते के मसौदे में लेबनान सहित विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों को समाप्त करने की बात भी शामिल है. इसके अलावा अमेरिका द्वारा ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और उसकी संप्रभुता का सम्मान करने का आश्वासन देने की चर्चा है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करने और अतिरिक्त सैन्य तैनाती से बचने पर सहमत हो सकता है.
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं. जानकारी के अनुसार, समझौते के लागू होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर इस मार्ग को पूरी तरह खोलने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.
समझौते के तहत ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा और परमाणु हथियार न बनाने का आश्वासन देगा. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रतिरोध समूहों को दिया जाने वाला समर्थन इस समझौते का हिस्सा नहीं होगा. परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों को लेकर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए लगभग 60 दिनों की अतिरिक्त वार्ता का प्रस्ताव रखा गया है.
समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र स्थापित करने की बात भी सामने आई है. यह तंत्र सभी शर्तों के पालन पर नजर रखेगा. साथ ही किसी भी अंतिम समझौते को अंतरराष्ट्रीय वैधता देने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी लेने का प्रस्ताव भी शामिल बताया जा रहा है. First Updated : Monday, 15 June 2026