US और ईरान के बीच जिनेवा में रविवार को हो सकता है शांति समझौता: रिपोर्ट

अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए रविवार तक शांति समझौता होने की संभावना जताई जा रही है, जिसकी मेजबानी जिनेवा कर सकता है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य टकराव को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता जल्द सामने आ सकता है. पश्चिमी देशों के एक सूत्र के हवाले से शुक्रवार को बताया गया कि दोनों देशों के बीच रविवार तक शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. इसके लिए स्विट्जरलैंड का शहर जिनेवा सबसे संभावित स्थान माना जा रहा है, जहां अंतिम दौर की बातचीत पूरी की जा सकती है.

समझौते के मसौदे पर काम जारी 

सूत्रों के अनुसार, समझौते के मसौदे पर अभी भी काम जारी है और दोनों पक्ष कुछ प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं. वार्ता में सबसे बड़ी अड़चन लेबनान की स्थिति को लेकर बताई जा रही है. ईरान चाहता है कि समझौते में लेबनान में जारी संघर्ष को समाप्त करने की स्पष्ट व्यवस्था शामिल हो. वहां इज़रायल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है, जिसे तेहरान व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता से जोड़कर देख रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, वार्ताकारों का लक्ष्य शनिवार तक सभी शर्तों को अंतिम रूप देना है ताकि अगले दिन औपचारिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी की जा सके. बताया जा रहा है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ संभावित रूप से इस समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. हालांकि, समझौते के आयोजन स्थल की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन जिनेवा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है.

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या संकेत दिए? 

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को संकेत दिया था कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि ईरान के साथ युद्ध को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता तैयार हो चुका है और इसी वजह से उन्होंने नए सैन्य हमलों की योजना को आगे नहीं बढ़ाया.

हालांकि, समझौते से जुड़ी जो प्रारंभिक जानकारी सामने आई है, उससे यह संकेत मिलता है कि ईरान की कई प्रमुख मांगों को इसमें जगह मिल सकती है. विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान को समझौते से अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिलता दिखाई दे रहा है, जबकि अमेरिका की प्राथमिक उपलब्धियों में सबसे महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य का दोबारा खुलना हो सकता है. ईरान ने इसे फरवरी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर व्यापक असर पड़ा था.

यदि यह समझौता सफलतापूर्वक संपन्न होता है, तो इससे न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव कम हो सकता है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थिरता और शांति की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जाएगा.

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