ईरान से आर-पार की जंग! खाड़ी में US आर्मी को उतारा, क्या अब जमीनी हमला होगा?
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, जहां सैन्य तैनाती और हमले लगातार बढ़ रहे हैं. करीब 7,000 अमेरिकी सैनिकों की तैनाती से संकेत मिल रहे हैं कि हालात बड़े जमीनी संघर्ष की ओर बढ़ सकते हैं.

मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार गहराता जा रहा है और हालात एक बड़े टकराव की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं. अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को चार हफ्ते पूरे हो चुके हैं, लेकिन स्थिति सामान्य होने के बजाय और विस्फोटक हो गई है. एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ बातचीत की बात कर रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी सेना की भारी तैनाती खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है, जिससे सैन्य संघर्ष की आशंका और मजबूत हो गई है.
तनाव का केंद्र ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अब तक ईरान के हजारों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है. इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइल यूनिट्स और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े अहम ठिकाने शामिल हैं. इस पूरे तनाव का केंद्र ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ बना हुआ है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है. ईरान द्वारा इस रास्ते को बाधित करने की कोशिशों के जवाब में अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत को और आक्रामक तरीके से तैनात करना शुरू कर दिया है.
खाड़ी की ओर बढ़ रही अमेरिकी सैन्य ताकत में ‘यूएसएस ट्रिपोली’ के नेतृत्व वाला एम्फीबियस रेडी ग्रुप अहम भूमिका निभा रहा है. यह युद्धपोत आधुनिक लड़ाकू विमानों और मरीन सैनिकों को तैनात करने में सक्षम है. इसके अलावा ‘यूएसएस बॉक्सर’ समूह भी कैलिफोर्निया से रवाना हो चुका है, जिसमें हजारों मरीन सैनिक शामिल हैं. इनकी तैनाती को तय समय से पहले तेज किया गया है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है.
2,000 सैनिकों को मध्य पूर्व भेजने का फैसला
जमीनी मोर्चे को मजबूत करने के लिए अमेरिका ने अपनी तेज-तर्रार 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के करीब 2,000 सैनिकों को भी मध्य पूर्व भेजने का फैसला किया है. यह यूनिट बेहद कम समय में किसी भी क्षेत्र में उतरकर रणनीतिक ठिकानों पर कब्जा करने में माहिर मानी जाती है. इनके साथ-साथ अन्य सैनिकों को मिलाकर करीब 7,000 अतिरिक्त जवान इस अभियान में शामिल किए जा रहे हैं.
दूसरी ओर, ईरान भी पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा है. वह लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए जवाब दे रहा है. खाड़ी में बढ़ती सैन्य हलचल यह संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सैन्य जमावड़ा केवल दबाव बनाने की रणनीति है या फिर किसी बड़े जमीनी युद्ध की तैयारी. अगले कुछ सप्ताह इस पूरे क्षेत्र के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं.


