दो साल से युद्ध और तबाही झेल रहे गाजा में आखिरकार शांति की उम्मीद जगी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 20 सूत्री शांति योजना के पहले चरण को अब हमास ने भी स्वीकार कर लिया है. पहले ही इस योजना पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सहमति मिल चुकी थी. इसके साथ ही गाजा पट्टी में संघर्ष कम होने और शांति स्थापना की उम्मीदें बढ़ गई हैं. दोनों पक्षों से बंधकों की रिहाई की आशा भी जग गई है.
हालांकि, इसी बीच दुनिया के तीसरे मोर्चे पर नई जंग की आहट तेज हो गई है. चीन ने ताइवान के साथ बढ़ते तनाव के बीच यांग्त्ज़ी नदी के मुहाने पर बड़ी संख्या में युद्धपोत और पनडुब्बियां तैनात कर दी हैं.
हमास और इजराइल के बीच ट्रंप के शांति प्रस्ताव को लेकर सहमति ने गाजा में उम्मीदों को जगा दिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस योजना के पहले चरण को लागू करने से ना केवल हमले रुकेंगे, बल्कि बंधकों की सुरक्षित रिहाई की राह भी साफ होगी. यह कदम मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष में स्थायित्व लाने का प्रयास है.
हाल ही में सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीन ने यांग्त्ज़ी नदी के मुहाने पर बड़ी संख्या में युद्धपोत और पनडुब्बियां तैनात की हैं. यह तैनाती दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा रही है. ओपन सोर्स रक्षा विश्लेषक एमटी एंडरसन ने बताया कि तस्वीरों में टाइप 071 युझाओ-क्लास लैंडिंग प्लेटफ़ॉर्म डॉक (LPD) भी नजर आया. यह 25,000 टन का ट्रांसपोर्टेशन शिप है, जो किसी उभयचर हमले के दौरान लैंडिंग क्राफ्ट, बख्तरबंद वाहन और सैकड़ों सैनिकों को तट तक ले जाने में सक्षम है.
ताइवान और चीन के बीच पुराना विवाद
चीन ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग की धमकी दे चुका है. हाल के दिनों में चीनी सेना ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किए हैं और लगभग हर दिन ताइवान पर अपनी सैन्य उड़ानें संचालित की हैं. ताइपे और वाशिंगटन ने इस कदम को क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने वाला बताया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यांग्त्ज़ी नदी के मुहाने पर यह तैनाती रणनीतिक महत्व रखती है और भविष्य में ताइवान जलडमरूमध्य में किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी भी हो सकती है.
First Updated : Thursday, 09 October 2025