नई दिल्ली: बांग्लादेश में हालिया चुनाव में बीएनपी ने बड़ी जीत हासिल की है. तारिक रहमान, जो खालिदा जिया के बेटे हैं, अब प्रधानमंत्री बनने की ओर बढ़ रहे हैं. जमात-ए-इस्लामी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से काफी दूर रही. यह बदलाव दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़ा मोड़ है.
भारत के लिए यह स्थिति चुनौती से ज्यादा मौका लेकर आई है. पीएम नरेंद्र मोदी ने तुरंत बधाई दी और मजबूत संबंधों की बात की. आइए 5 मुख्य पॉइंट्स में समझते हैं कि यह जीत भारत के लिए क्यों सकारात्मक है.
जमात-ए-इस्लामी का वैचारिक रुख पाकिस्तान समर्थक और कट्टरपंथी माना जाता है. अगर इसे ज्यादा ताकत मिलती, तो पूर्वोत्तर भारत की सीमाओं पर अस्थिरता, घुसपैठ और कट्टर ताकतों की सक्रियता बढ़ सकती थी. बीएनपी की जीत से जमात विपक्ष में सीमित रह गई है. इससे भारत को तत्काल सुरक्षा खतरे का सामना नहीं करना पड़ेगा।.
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था संकट में है जैसे- विदेशी मुद्रा कम, महंगाई ज्यादा और निर्यात पर दबाव बढ़ गया है. नई सरकार की पहली प्राथमिकता अर्थव्यवस्था सुधारना होगी. भारत से व्यापार, ऊर्जा, बिजली निर्यात, पाइपलाइन और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट पहले से चल रहे हैं.
भारतीय निवेश करीब 5 अरब डॉलर है. बीएनपी को इन परियोजनाओं को जारी रखना होगा, वरना विकास रुक जाएगा. इससे भारत के साथ सहयोग बढ़ेगा.
भारत ने पहले से बीएनपी के साथ संवाद बनाए रखा. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खालिदा जिया की मौत पर ढाका जाकर सम्मान जताया. बैकचैनल बातचीत और कूटनीति से रिश्ते टूटने का खतरा कम हुआ. अब नई सरकार के लिए भारत-विरोधी रुख अपनाना मुश्किल होगा.
भारत और बांग्लादेश रेल, सड़क, जलमार्ग और सीमा हाट से जुड़े हैं. पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी बांग्लादेश पर निर्भर है. इन प्रोजेक्ट्स को रोकना दोनों देशों को नुकसान पहुंचाएगा. बीएनपी के लिए इन्हें आगे बढ़ाना घरेलू स्तर पर फायदेमंद होगा. इससे स्थिर संबंध बने रहेंगे.
दुनिया में चीन-पाकिस्तान गठजोड़ मजबूत है. बांग्लादेश के लिए एकतरफा झुकना जोखिम भरा है. भारत क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा में बड़ा साथी है. तारिक रहमान की सरकार को भारत जैसे विश्वसनीय पड़ोसी की जरूरत पड़ेगी. First Updated : Friday, 13 February 2026