'पाकिस्तान से आए और कश्मीर में लड़े', हिजबुल मुजाहिदीन डिप्टी चीफ के बयान ने मचाई हलचल

जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से आतंकवाद को लेकर एक बार फिर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं. सामने आए एक वीडियो में संगठन के उप-प्रमुख शमशेर खान ने दावा किया कि पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग जम्मू-कश्मीर पहुंचे और वहां लड़ाई में शामिल हुएं.

Yashika Jandwani

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से आतंकवाद को लेकर एक बार फिर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं. बता दें, प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के एक कमांडर के हालिया बयान ने इस मुद्दे को नई चर्चा में ला दिया है. सामने आए एक वीडियो में संगठन के उप-प्रमुख शमशेर खान ने दावा किया कि पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग जम्मू-कश्मीर पहुंचे, वहां लड़ाई में शामिल हुए और कई की वहीं पर मौत हो गई. 

कब और कहां दिया गया ये बयान   

बताया जा रहा है कि यह बयान 8 जुलाई को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया. यह कार्यक्रम हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर बुरहान वानी की बरसी के मौके पर आयोजित किया गया था. कार्यक्रम में शमशेर खान ने बुरहान वानी और अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की तस्वीरों के बीच संबोधन दिया. 

'कश्मीर से लड़ी लड़ाई'

इसके साथ ही अपने भाषण में शमशेर खान ने दावा किया कि कश्मीर के लोलाब, कुपवाड़ा और कठुआ जैसे इलाकों के कब्रिस्तानों में पाकिस्तानी नागरिकों की कब्रें मौजूद हैं. उसने कहा कि पाकिस्तान से आए लोगों ने कश्मीर में लड़ाई लड़ी और अपनी जान गंवाई. उसके मुताबिक, यही बलिदान पाकिस्तान और कश्मीर के बीच संबंधों को मजबूत बनाते हैं और इन्हें अलग नहीं किया जा सकता. 

भाषण के दौरान JAAC पर साधा गया निशाना 

भाषण के दौरान उसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर भी निशाना साधा. उसने संगठन को गद्दार और भारत समर्थक बताते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग पाकिस्तान की विचारधारा और आतंकी लड़ाकों के बलिदान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. उसने ऐसे लोगों को चेतावनी भी दी कि इस तरह की गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी.

सीमा पर आंतकवाद को लेकर शुरू हुई नई बहस 

दरअसल, यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हैं. ऐसे में आतंकी संगठनों की ओर से इस तरह की बयानबाजी को अपने समर्थकों को एकजुट रखने और स्थानीय असंतोष का ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है. फिलहाल, यह वीडियो और इसमें किए गए दावे क्षेत्र में सीमा पार आतंकवाद को लेकर नई बहस का कारण बन गए हैं. 

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