शांति के नोबेल की चाहत में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही इजराइल और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान कर दिया हो, लेकिन इसके पीछे छिपी रणनीति को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं. सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या यह युद्धविराम महज एक जाल है—एक ऐसा चुपचाप बिछाया गया जाल जिससे ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई को उनके बंकर से बाहर लाया जा सके?
दरअसल, युद्ध की शुरुआत से ही खामेनेई किसी सीक्रेट अंडरग्राउंड बंकर में छिपे हुए हैं. वहीं से वह पूरे युद्ध की रणनीति तय कर रहे हैं, निर्देश दे रहे हैं, लेकिन खुद सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए. अमेरिका और इजराइल दोनों के लिए खामेनेई “टारगेट नंबर वन” बने हुए हैं.
इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू पहले ही कह चुके हैं कि जब तक खामेनेई जिंदा हैं, तब तक इजराइल को चैन नहीं मिलेगा. वहीं, इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने खामेनेई की तुलना सद्दाम हुसैन से करते हुए खुलेआम उन्हें फांसी पर लटकाने की बात कही थी. डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि “हमें पता है खामेनेई कहां छिपे हैं, वो हमारे लिए आसान टारगेट हैं लेकिन हम फिलहाल उन्हें मारेंगे नहीं.” इन संकेतों के बाद यह सवाल और मजबूत हो गया है कि सीजफायर सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक युद्ध है ताकि खामेनेई खुद को सुरक्षित समझें और बाहर निकलें.
पिछले कुछ हफ्तों में इजराइल की एयर फोर्स ने उन सभी संभावित बंकरों पर बम गिराए हैं, जहां खामेनेई के होने की आशंका थी. लेकिन नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं मिले. इसलिए अब अमेरिका और इजराइल को लगने लगा है कि जब तक बम गिरते रहेंगे, तब तक खामेनेई बंकर से नहीं निकलेंगे. ऐसे में शांति की घोषणा कर दी गई है ताकि जैसे ही वह बाहर आएं, उन्हें निशाना बनाया जा सके.
हालांकि ट्रंप ने हालिया बयान में कहा कि अमेरिका का ईरान में सत्ता परिवर्तन का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता कि अराजकता फैले. ईरानी लोग अच्छे व्यापारी हैं, उनके पास तेल है, उन्हें ठीक रहना चाहिए.” लेकिन कूटनीतिक गलियारों में यह बयान एक “पॉलिटिकल शील्ड” माना जा रहा है—जाहिर तौर पर अमेरिका और इजराइल की रणनीति गहरी और लंबी है. First Updated : Wednesday, 25 June 2025