नई दिल्ली : ईरान पर हालिया हमलों की जिम्मेदारी इजरायल और अमेरिका पर जाती है, लेकिन इस घटना ने चीन की सैन्य तकनीक को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है. दरअसल, ईरान ने अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पिछले वर्ष चीन से तेल के बदले हथियारों की योजना के तहत HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम प्राप्त किया था. मगर 28 फरवरी 2026 को हुए हमलों के दौरान यह सिस्टम ईरान की रक्षा करने में पूरी तरह असफल रहा और महज एक घंटे में ही बेअसर साबित हो गया.
आपको बता दें कि यह पहली दफा नहीं है जब HQ-9B सिस्टम की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हों. मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चले "ऑपरेशन सिंदूर" के समय भी यह सिस्टम सुर्खियों में आया था. पाकिस्तान ने इसे अपनी हवाई रक्षा के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन भारतीय सेना की कार्रवाई के सामने यह बेअसर रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि उस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की समग्र एयर डिफेंस व्यवस्था धीरे-धीरे नाकाम हो गई, जिससे कई रणनीतिक स्थानों को भारी नुकसान पहुंचा. अब ईरान की घटना ने इस सिस्टम की कमजोरियों को और उजागर कर दिया है, जहां इसे तेहरान, नतांज और फोर्दो जैसे संवेदनशील परमाणु केंद्रों की सुरक्षा के लिए लगाया गया था.
दरअसल, HQ-9B चीन द्वारा विकसित एक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जिसे रूसी एस-300 और अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम से प्रेरणा लेकर बनाया गया माना जाता है. इसकी मारक क्षमता करीब 260 किलोमीटर तक है और यह 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम है. इसके अलावा, यह एक साथ 100 से अधिक लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और 6 से 8 लक्ष्यों पर एक साथ हमला करने की क्षमता रखता है. चीन ने खुद इसे अपनी राजधानी बीजिंग और दक्षिण चीन सागर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की रक्षा के लिए तैनात किया है.
ईरान ने अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से जुलाई 2025 में चीन से HQ-9B सिस्टम हासिल किया था. यह सौदा तेल के बदले हथियारों की एक बड़ी योजना का हिस्सा था, जो जून 2025 में इजरायल के साथ हुए सीजफायर के बाद हुआ. जून में इजरायल ने "ऑपरेशन राइजिंग लायन" के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाते हुए गहराई तक हमले किए थे, जिसमें अमेरिका ने भी अंत में बमबारी की थी. उस समय ईरान ने दावा किया था कि उसके परमाणु केंद्रों पर कोई खास असर नहीं पड़ा, लेकिन इस बार के हमलों में वह कह रहा है कि परमाणु स्थलों को लक्ष्य बनाया गया.
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) का कहना है कि इसके पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं. ईरान ने एचक्यू-9बी को रूसी और स्वदेशी सिस्टमों के साथ मिलाकर एक बहुस्तरीय रक्षा तंत्र बनाया था, लेकिन संयुक्त हमलों के आगे यह पूरी व्यवस्था कमजोर साबित हुई.
First Updated : Tuesday, 03 March 2026