अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच चीन ने नए युद्ध को दी दस्तक! इस छोटे देश को दी खुली चुनौती
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार देर रात बताया कि पेंघु द्वीपों के दक्षिण-पश्चिमी समुद्री इलाके में चीन का एक डिस्ट्रॉयर और एक फ्रिगेट घुस आया था। मंत्रालय ने दोनों जहाजों की हवाई तस्वीरें भी जारी कीं, लेकिन उनकी सही लोकेशन नहीं बताई।

नई दिल्ली: दुनिया इस वक्त जंग और वर्चस्व की लड़ाई के दौर से गुजर रही है। एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है, तो दूसरी तरफ चीन ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है। ताजा मामले में ताइवान ने दावा किया है कि पेंघु द्वीप समूह के पास चीन के दो युद्धपोत देखे गए हैं। इसके बाद ताइवान ने तुरंत अलर्ट जारी कर दिया और सुरक्षा बढ़ा दी है।
चीन के 2 युद्धपोत ने बढ़ा दी टेंशन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार देर रात बताया कि पेंघु द्वीपों के दक्षिण-पश्चिमी समुद्री इलाके में चीन का एक डिस्ट्रॉयर और एक फ्रिगेट घुस आया था। मंत्रालय ने दोनों जहाजों की हवाई तस्वीरें भी जारी कीं, लेकिन उनकी सही लोकेशन नहीं बताई।
चीनी युद्धपोतों की हरकत देखते ही ताइवान ने नौसेना और वायुसेना को तैनात कर दिया। ताइवानी सेना ने कहा कि हमने चीनी गठन पर कड़ी नजर रखी और जरूरी जवाबी कार्रवाई की। हालांकि, जवाबी कदमों की डिटेल नहीं दी गई।
चीन की घुसपैठ से ताइवान परेशान
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। लोकतांत्रिक ताइवान के चारों ओर वह लगभग रोज युद्धपोत और लड़ाकू विमान भेजता रहता है। ताइवान सरकार बार-बार इसका विरोध करती है, लेकिन चीन अपनी सैन्य गतिविधियां बंद नहीं कर रहा। आमतौर पर ताइवान रक्षा मंत्रालय चीनी विमानों की रोज की हलचल की जानकारी देता है।
लेकिन, युद्धपोतों पर कम ही बोलता है। सिर्फ जब कोई एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल होता है, तभी डिटेल बयान आता है। इस बार दो युद्धपोतों के घुसने पर ताइवान ने खुलकर जानकारी दी है। माना जा रहा है कि चीन ताइवान स्ट्रेट में अपनी सैन्य ताकत और बढ़ाना चाहता है।
ताइवान ने खारिज कर दिए चीन के दावे
गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि ताइवान के आसपास उसकी सैन्य गतिविधियां "पूरी तरह न्यायसंगत और उचित" हैं। चीन ने तनाव के लिए ताइपे सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। जवाब में ताइवान ने बीजिंग के संप्रभुता के दावों को सिरे से खारिज कर दिया।
ताइवान का कहना है कि द्वीप का भविष्य तय करने का हक सिर्फ यहां के लोगों को है। फिलहाल पेंघु द्वीप के पास हुई इस ताजा घटना पर चीन के रक्षा मंत्रालय ने कोई बयान नहीं दिया है। लेकिन इलाके में तनाव जरूर बढ़ गया है।


