अमेरिका द्वारा F-35 फाइटर जेट बेचने से इनकार करने के बाद तुर्की ने अपनी रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए ब्रिटेन का रुख किया है. राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन अब यूरोपियन निर्मित युद्धक विमान "यूरोफाइटर टाइफून" की खरीद पर फोकस कर रहे हैं. इस सौदे से न सिर्फ तुर्की की वायुसेना को मजबूती मिलेगी, बल्कि घरेलू तौर पर भी एर्दोगन को राजनीतिक लाभ मिल सकता है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्की और ब्रिटेन के बीच 40 यूरोफाइटर टाइफून विमानों की खरीद को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है. ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि इस्तांबुल में चल रहे रक्षा प्रदर्शनी "IDEF 2025" के दौरान इस डील पर औपचारिक सहमति हो सकती है.
तुर्की लंबे समय से अमेरिका से F-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने की कोशिश कर रहा था. राष्ट्रपति एर्दोगन ने खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी इस मसले पर बात की थी, लेकिन वाशिंगटन ने यह सौदा रद्द कर दिया. इसके पीछे रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम की खरीद को प्रमुख कारण बताया गया.
मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की और ब्रिटेन के बीच यूरोफाइटर टाइफून की खरीद को लेकर एक अस्थायी समझौता तैयार है. यह डील ब्रिटेन के रक्षा सचिव जॉन हीली की इस्तांबुल यात्रा के दौरान पक्की हो सकती है. यह विमान चार यूरोपीय देशों ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और स्पेन की संयुक्त परियोजना है, इसलिए अंतिम मंजूरी में इन सभी की सहमति जरूरी होगी.
2024 में तुर्की ने जर्मनी के वीटो को कूटनीतिक प्रयासों से दरकिनार करते हुए डील पर आगे बढ़ने का रास्ता साफ किया. रक्षा मंत्री यासर गुलर ने भी कहा था कि “यूरोफाइटर हमारे लिए एक व्यवहारिक और प्रभावशाली विकल्प है, और हम इसे हासिल करना चाहते हैं.”
ब्रिटेन ने 40 यूरोफाइटर टाइफून की शुरुआती कीमत लगभग 12 अरब डॉलर बताई थी, जिसे तुर्की ने "महंगा" करार दिया. फिलहाल दोनों देशों के बीच कीमत, तकनीक ट्रांसफर और पायलट ट्रेनिंग जैसे मुद्दों पर बातचीत जारी है. चूंकि तुर्की की वायुसेना अब तक सिर्फ अमेरिकी F-16 विमानों पर निर्भर रही है, इसलिए यूरोपीय विमान के लिए विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होगी.
प्रस्तावित सौदे में शामिल यूरोफाइटर टाइफून का "ट्रैंच 4" मॉडल है, जिसमें अत्याधुनिक एवियोनिक्स और रडार सिस्टम मौजूद हैं. तुर्की की वायुसेना के पुराने होते बेड़े को देखते हुए, यह कदम उसकी रक्षा क्षमताओं को तुरंत बढ़ाने में मदद करेगा. जब तक घरेलू रूप से विकसित KAAN फाइटर जेट 2028 में सेवा में नहीं आता, तब तक यह विकल्प अहम रहेगा.
तेजी से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अंकारा खाड़ी देशों जैसे कतर से सेकेंड-हैंड यूरोफाइटर खरीदने की संभावनाएं भी तलाश रहा है. यह कदम तुर्की को त्वरित राहत देने के साथ-साथ उसकी वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता को बरकरार रखने में मदद करेगा. First Updated : Wednesday, 23 July 2025