ट्रंप की हो गई तगड़ी बेइज्जती! भारत के जहाज ने पार किया होमुर्ज, 7 देशों को फोन करने के बाद भी अमेरिका लाचार
अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच भारत ने अपने दो जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करके भारत लौट आई है. जैसे ही यह जहाज भारत पहुंची तुरंत अमेरिका का इसपर बयान सामने आया है.

नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की नजरों में है. यहां से दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है. हाल ही में भारत के दो जहाज सुरक्षित रूप से इस जलमार्ग से निकलकर भारत लौट आए. ईरान ने भारत के साथ अच्छे संबंधों को देखते हुए इन जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया. भारत और ईरान के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने ईरानी नेताओं से बात की है.
अमेरिका ने दी सफाई
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि अभी अमेरिका को होर्मुज से कुछ ईरानी, भारतीय और चीनी जहाजों के गुजरने से कोई समस्या नहीं है. उन्होंने बताया कि ईंधन ले जाने वाले जहाजों की संख्या बढ़ रही है. ईरानी जहाज पहले ही निकल चुके हैं और दुनिया को सप्लाई जारी रखने के लिए ऐसा होने दिया गया. भारतीय जहाज भी गुजरे हैं और कुछ चीनी जहाज भी निकले हैं.
बेसेंट ने कहा कि अभी कोई नौसैनिक बेड़ा या सुरक्षा बल आने से पहले ही ईरान से तेल की आपूर्ति में कमी स्वाभाविक रूप से हो सकती है. फिलहाल अमेरिका चाहता है कि दुनिया को पर्याप्त तेल मिलता रहे. उन्होंने आगे कहा कि तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए कोई बड़ा कदम संघर्ष की अवधि पर निर्भर करेगा. अगर जंग लंबी चली तो अन्य उपाय सोचे जा सकते हैं.
ट्रंप ने 7 देशों से मांगी मदद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए करीब सात देशों से संपर्क किया है. उन्होंने इन देशों से युद्धपोत भेजने की मांग की है ताकि तेल के जहाज सुरक्षित गुजर सकें. ट्रंप ने नाम नहीं बताए, लेकिन कहा कि ये वे देश हैं जो मध्य पूर्व के तेल पर बहुत निर्भर हैं.
उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन जैसे देशों से अपील की थी कि वे अपने जहाज भेजे. हालांकि, अभी तक किसी देश ने स्पष्ट हामी नहीं भरी है.
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका खुद इस जलमार्ग पर कम निर्भर है, लेकिन दुनिया के लिए यह जरूरी है. उन्होंने कहा कि ये देश अपने हित में आगे आएं और अमेरिका उनकी मदद करेगा. कई देश अभी विचार कर रहे हैं, लेकिन कोई बड़ा ऐलान नहीं हुआ.


