नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का संकेत दिया. उन्होंने कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो अमेरिका ईरान पर और अधिक दबाव बनाएगा. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए ईरान के तेल और गैस क्षेत्र को निशाना बनाते हुए चेतावनी दी कि अमेरिका भविष्य में इन संसाधनों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की क्षमता रखता है. उनके इस बयान ने पहले से तनावपूर्ण क्षेत्रीय स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है.
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दूसरे दिन भी सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों की खबरें सामने आईं. क्षेत्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता टकराव पूरे मध्य पूर्व को व्यापक संघर्ष की ओर धकेल सकता है. गुरुवार तड़के ईरान में हुए अमेरिकी हमलों को पिछले दिन की तुलना में अधिक व्यापक और तीव्र बताया गया, हालांकि तेहरान ने इन हमलों से हुए नुकसान के बारे में सीमित जानकारी ही साझा की.
ईरान ने दावा किया कि उसने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन की दिशा में जवाबी कार्रवाई की है. वहीं अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने ईरानी सैन्य ढांचे, निगरानी तंत्र, संचार प्रणालियों और वायु रक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई ईरान की कथित आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई.
इस बीच समुद्री क्षेत्र में भी तनाव बढ़ता दिखाई दिया. अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने एक ऐसे तेल टैंकर को निष्क्रिय करने के लिए मिसाइलों का इस्तेमाल किया जो कथित तौर पर अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था. अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी लागू करने के प्रयासों के तहत यह कार्रवाई की गई. रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में ऐसे कई जहाजों के खिलाफ कदम उठाए गए हैं.
संघर्ष का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है. होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में बढ़ते खतरे ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए किसी भी व्यवधान का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है.
वहीं, युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की कोशिशें भी फिलहाल ठहरती नजर आ रही हैं. ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि हालिया अमेरिकी हमलों ने शांति प्रयासों को गंभीर झटका पहुंचाया है. दूसरी ओर, अमेरिका का कहना है कि क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए वह आवश्यक कदम उठाता रहेगा. ऐसे में मध्य पूर्व की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम किस दिशा में जाता है, यह वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा. First Updated : Thursday, 11 June 2026