'हां, हमने ही दागीं हेलफायर मिसाइलें'...अमेरिका ने भारतीय दल वाले जहाज पर हमले की बात मानी
ओमान के पास भारतीय चालक दल वाले जहाज MT जलवीर पर हमले के बाद अमेरिका ने कार्रवाई की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि जहाज अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच समुद्री मार्गों की सुरक्षा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है. ओमान के शिनास बंदरगाह के निकट भारतीय चालक दल वाले एक व्यापारिक जहाज पर आग लगने की घटना के बाद क्षेत्रीय हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं. रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने स्वीकार किया है कि उसने एक कार्रवाई के दौरान भारतीय क्रू वाले जहाज MT जलवीर को निशाना बनाया था. इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और विदेशी नाविकों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
कार्रवाई कब हुई?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, यह कार्रवाई उस समय की गई जब संबंधित जहाज कथित रूप से ईरान से तेल ले जा रहा था और अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था. अमेरिकी पक्ष का दावा है कि चेतावनियों की अनदेखी किए जाने के बाद विमान से जहाज के इंजन कक्ष को निशाना बनाते हुए हेलफायर मिसाइलें दागी गईं. हालांकि इस कार्रवाई के बाद जहाज पर मौजूद चालक दल की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं.
बताया जा रहा है कि इस सप्ताह ओमान के आसपास भारतीय नाविकों से जुड़े जहाजों पर यह तीसरी बड़ी घटना है. MT जलवीर पर कुल 20 चालक दल के सदस्य सवार थे. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, बचाव अभियान जारी है और सभी कर्मियों की स्थिति को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है. इस घटना ने समुद्री क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है.
इससे पहले भी क्षेत्र में भारतीय चालक दल वाले अन्य जहाजों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई थीं. बुधवार को ओमान तट के पास एक अन्य जहाज पर हमले की सूचना मिली थी, जिसमें कई नाविक प्रभावित हुए थे. वहीं सोमवार को एक अलग व्यापारिक पोत में आग लगने की घटना ने भी अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए थे.
भारत ने जाहिर की चिंता
इन घटनाओं के बाद भारत ने अपनी चिंता जाहिर की है. भारतीय अधिकारियों ने समुद्र में कार्यरत नागरिक नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है. भारत का कहना है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई के दौरान निर्दोष नागरिकों और व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब केवल जमीन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी दिखाई देने लगा है. ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर यह जिम्मेदारी है कि वह समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाए रखने और नागरिक जहाजों को संघर्ष की चपेट में आने से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए.


