ट्रंप के निशाने पर ईरान का सबसे गुप्त परमाणु ठिकाना, पिकैक्स माउंटेन को उड़ाने का किया ऐलान

ईरान के गहरे भूमिगत परमाणु ठिकाने को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने ताजा बयान जारी किया है. ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका भविष्य में इस पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है. उनके अनुसार, ईरान के परमाणु कार्यक्रम की गतिविधियों पर अमेरिका लगातार नजर रख रहा है.

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नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है. इस बार चर्चा का केंद्र ईरान का एक बेहद गुप्त भूमिगत परमाणु ठिकाना है, जो जाग्रोस पर्वत श्रृंखला के नीचे गहराई में बना हुआ बताया जाता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ठिकाने को लेकर सख्त बयान दिया है और संकेत दिए हैं कि अमेरिका भविष्य में इस पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है. 

रिपोर्टों के मुताबिक, जाग्रोस पर्वत श्रृंखला के भीतर स्थित कुह-ए कोलंग गज ला (जिसे पिकैक्स माउंटेन भी कहा जाता है) के नीचे एक विशाल भूमिगत सुरंग नेटवर्क मौजूद है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस परिसर का इस्तेमाल यूरेनियम संवर्धन या उच्च स्तर के परमाणु पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए किया जा सकता है. यह ठिकाना नतांज परमाणु केंद्र से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित बताया जाता है. नतांज साइट पहले भी अमेरिकी बंकर-बस्टर बमों के हमले का सामना कर चुकी है, लेकिन यह नया भूमिगत परिसर अब भी सुरक्षित माना जा रहा है.

ट्रंप ने दी खुली चेतावनी

एक इंटरव्यू के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस गुप्त ठिकाने को लेकर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि अमेरिका पिकैक्स माउंटेन पर लगातार नजर बनाए हुए है और वहां की हर गतिविधि पर निगरानी रखी जा रही है. ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका इस ठिकाने के खिलाफ कार्रवाई करेगा. उनके अनुसार, ईरान के परमाणु कार्यक्रम की गतिविधियों पर अमेरिका लगातार नजर रख रहा है और किसी भी संदिग्ध कदम का जवाब देने के लिए तैयार है.

पहले भी कर चुके हैं बड़े दावे

ट्रंप इससे पहले भी कई बार यह दावा कर चुके हैं कि पिछले वर्ष अमेरिकी हमलों के कारण ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचा था. हालांकि अब उसी क्षेत्र में मौजूद इस नए भूमिगत परिसर को लेकर उनका ताजा बयान यह संकेत देता है कि अमेरिका अभी भी ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर सतर्क बना हुआ है. उनके हालिया बयान ने यह भी साफ कर दिया है कि अमेरिका इस ठिकाने को संभावित सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रहा है.

क्या अमेरिकी बंकर-बस्टर बम यहां तक पहुंच पाएंगे?

अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह भूमिगत परिसर इतनी गहराई में बनाया गया है कि मौजूदा अमेरिकी बंकर-बस्टर बम भी वहां तक आसानी से नहीं पहुंच सकते. परमाणु मामलों के जानकारों के अनुसार, अमेरिका के सबसे शक्तिशाली बंकर-बस्टर बम लगभग 200 फीट तक मिट्टी और चट्टानों को भेद सकते हैं या करीब 20 फीट मोटे कंक्रीट को तोड़ सकते हैं. जबकि अनुमान है कि इस परिसर के कुछ हिस्से जमीन से 260 से 330 फीट नीचे बने हुए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह गहराई ईरान के फोर्डो परमाणु संयंत्र से भी अधिक हो सकती है, जिससे इस ठिकाने को निशाना बनाना काफी मुश्किल हो जाता है.

2020 से जारी है निर्माण कार्य

जानकारी के अनुसार, नतांज परमाणु केंद्र के दक्षिणी हिस्से में स्थित इस भूमिगत परियोजना पर वर्ष 2020 से लगातार काम चल रहा है. शुरुआत में ईरान ने कहा था कि यहां उस सेंट्रीफ्यूज असेंबली सुविधा का पुनर्निर्माण किया जा रहा है, जिसे पहले हुई तोड़फोड़ में नुकसान पहुंचा था. हालांकि बाद में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों और विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया गया कि अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद भी इस स्थान पर निर्माण कार्य जारी रहा. सितंबर 2025 के बाद की तस्वीरों में भी गतिविधियां दिखाई देने की बात कही गई है.

IAEA भी नहीं कर सका निरीक्षण

रिपोर्टों के अनुसार, इस भूमिगत परिसर का अब तक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) द्वारा निरीक्षण नहीं किया गया है. यही वजह है कि इस ठिकाने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं. हाल के महीनों में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में सुरंगों के प्रवेश द्वारों को और मजबूत किए जाने, नई सुरक्षा दीवारों के निर्माण, खुदाई की गई मिट्टी के बड़े ढेर और भारी मशीनों की मौजूदगी जैसे संकेत मिले हैं. विश्लेषकों का मानना है कि इन गतिविधियों से यह संकेत मिलता है कि ईरान इस परिसर को लगातार विकसित कर रहा है और भविष्य में किसी संभावित हवाई हमले से बचाने के लिए इसकी सुरक्षा और मजबूत करने में जुटा हुआ है. First Updated : Tuesday, 14 July 2026