अली खामेनेई के जनाजे से पहले ही 3000 मौतों की आशंका, खोदी गईं हजारों कब्रें!

तेहरान में मौजूद एक पत्रकार के हाथ नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट और ईरानी रेड क्रेसेंट की एक टॉप-सीक्रेट चिट्ठी लगी है। यह चिट्ठी फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट मोहम्मद रेजा आरिफ को भेजी गई है।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: ऊपर से ताकत का प्रदर्शन, अंदर डर का माहौल। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे की रस्में तेहरान से शुरू हो चुकी हैं। लेकिन इसी बीच जर्मनी के मीडिया हाउस WELT की एक रिपोर्ट ने पूरे ईरान में हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी सरकार को जनाजे के दौरान 1500 से 3000 लोगों की मौत की आशंका है और इसके लिए पहले से ही इंतजाम कर लिए गए हैं।  

रेड क्रेसेंट की गोपनीय चिट्ठी और कब्रों की तैयारी    

तेहरान में मौजूद एक पत्रकार के हाथ नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट और ईरानी रेड क्रेसेंट की एक टॉप-सीक्रेट चिट्ठी लगी है। यह चिट्ठी फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट मोहम्मद रेजा आरिफ को भेजी गई है। इसमें साफ लिखा है कि जनाजे के दौरान भगदड़ या दूसरे हादसों में 1500 से 3000 लोग मारे जा सकते हैं।  

इसी डर की वजह से तेहरान के सबसे बड़े कब्रिस्तान 'बेहिश्त-ए-जहरा' में हजारों नई कब्रें रातोंरात खोद दी गई हैं। तेहरान नगर निगम के एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर इसकी पुष्टि की।  

उन्होंने कहा, "कब्रें वाकई तैयार हैं। अधिकारियों को हिदायत है कि भीड़ और 45 डिग्री की गर्मी में अगर 3000 मौतें भी हों तो स्थिति हाथ से न निकलने पाए।"  

तेहरान से मशहद तक, अरबों का खर्च    

खामेनेई का जनाजा शनिवार को तेहरान से शुरू हुआ। ये काफिला पहले कौम जाएगा, फिर इराक के नजफ और करबला होते हुए गुरुवार को मशहद में खत्म होगा। यहीं उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ईरानी हुक्मरान दावा कर रहे हैं कि इसमें करीब 2 करोड़ लोग शामिल होंगे।  

  • इस 'वीआईपी जनाजे' के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है।  
  • 11,000 से ज्यादा बसें सड़कों पर उतारी गई हैं  
  • मेट्रो और BRT 24 घंटे के लिए फ्री कर दी गई है  
  • तेहरान के लिए 15 मिलियन यूरो यानी करीब 135 करोड़ का बजट  
  • कौम और मशहद के लिए 5-5 मिलियन यूरो अलग से  

इराक के खर्च जोड़ दें तो ये आधुनिक इतिहास का सबसे महंगा सरकारी जनाजा बन सकता है।  

खूनी इतिहास और अंदरूनी सियासत   

ईरान में बड़े जनाजों का इतिहास खून से सना रहा है। 2020 में कासिम सुलेमानी के जनाजे में करमान में भगदड़ से 56 लोग मारे गए थे, 200 घायल हुए थे। 1989 में खुमैनी के जनाजे में भी 8 लोगों की मौत हुई थी। इसी वजह से इस बार 'डेड एंड मिसिंग' संभालने के लिए स्पेशल यूनिट भी बना दी गई है।  

लेकिन मामला सिर्फ सुरक्षा का नहीं है। जनाजे की आड़ में ईरान के अंदर सियासी घमासान तेज है। खामेनेई के कट्टर समर्थक अमेरिका से बातचीत के पक्षधर नेताओं को निशाने पर ले रहे हैं। विदेश मंत्री अब्बास अराघची और स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं।  

मंचों से अमेरिका के खिलाफ 'महायुद्ध' के ऐलान हो रहे हैं। वहीं आम जनता नाराज है कि जब देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है, तब सरकार ताकत दिखाने के लिए खजाना क्यों खोल रही है। फिलहाल जनाजा जारी है और दुनिया की नजरें तेहरान पर टिकी हैं।  

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