राफेल में लगेंगे भारतीय हथियार, फ्रांस ने दी स्वदेशी एकीकरण को मंजूरी

फ्रांस ने राफेल लड़ाकू विमानों के लिए तकनीक हस्तांतरण (ToT) और भारतीय हथियारों के एकीकरण पर सहमति जताई है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ और भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिलने की संभावना है. 'मेक इन India' अभियान को बढ़ावा देने और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से फ्रांस ने राफेल लड़ाकू विमानों से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों के हस्तांतरण और भारतीय हथियार प्रणालियों को इन विमानों में शामिल करने पर सकारात्मक रुख दिखाया है. माना जा रहा है कि यह कदम दोनों देशों के रक्षा संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाएगा.

फ्रांस की यात्रा जाएंगे पीएम मोदी

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही फ्रांस की यात्रा पर जाने वाले हैं. उनकी यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और सुरक्षा संबंधी मुद्दे प्रमुख चर्चा के विषय रह सकते हैं. प्रधानमंत्री फ्रांस में होने वाले अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ-साथ राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे.

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के तहत राफेल लड़ाकू विमानों के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) को मंजूरी देने पर सहमति बनी है. इसके अलावा भारत में विकसित मिसाइलों, हथियारों और अन्य सैन्य प्रणालियों को राफेल विमानों में एकीकृत करने की योजना भी समझौते का अहम हिस्सा होगी. फ्रांस का कहना है कि वह भारत को केवल रक्षा उपकरणों का खरीदार नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है.

भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 114 अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है. भारत ने इसके लिए फ्रांस को औपचारिक अनुरोध पत्र भेजा है. प्रस्तावित योजना के अनुसार इन विमानों का निर्माण फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन और भारतीय साझेदारों के सहयोग से भारत में किया जा सकता है, जिससे घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा.

भारत ने रखीं शर्तें 

भारत ने इस सौदे में कुछ प्रमुख शर्तें भी रखी हैं. इनमें स्वदेशी हथियारों का एकीकरण, भारतीय डेटा लिंक सिस्टम, डिजिटल नेटवर्किंग क्षमता और स्थानीय स्तर पर तकनीकी उत्पादन शामिल हैं. प्रस्तावित समझौते में विमान के ढांचे, इंजन और एवियोनिक्स से जुड़ी तकनीकों का हस्तांतरण भी शामिल हो सकता है.

राफेल के नए संस्करणों को लेकर भी चर्चा जारी है. भारतीय वायुसेना फिलहाल F3R मॉडल का उपयोग कर रही है, जबकि भारत भविष्य में F4 और विकसित हो रहे F5 संस्करणों को शामिल करने में रुचि रखता है. इन उन्नत विमानों में अत्याधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता, बेहतर संचार तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जो युद्धक्षेत्र में उनकी क्षमता को और मजबूत बनाएंगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना में 55 से 60 प्रतिशत तक स्वदेशी भागीदारी हासिल की जा सकती है. यदि यह योजना सफल होती है तो भारतीय रक्षा उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा और वायुसेना की परिचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी. पहले से मौजूद राफेल बेड़े और नौसेना के लिए दिए गए ऑर्डर के साथ यह सौदा भारत की वायु शक्ति को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.

Topics

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो